शिल्पकला एवं विज्ञान के प्रवर्तक ऋषि विश्वकर्मा- मनीष विश्वकर्मा

बागपत। ‘देव मानो तो उन्हीं कारीगरों, शिल्पियों को जिन्होंने मन्दिर बनाया।’ विश्वकर्मा समाज ने राज रिसोर्ट बागपत में सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए विश्वकर्मा पूजा दिवस पर हवन में आहुतियां देते हुए कोरोना महामारी से विश्व कल्याण की कामना करते हुए कहा कि ब्रह्मा के सप्तपुत्र ऋषियों में अंगिरा ऋषि की पुत्री योगसिद्धा वेदों की मर्मज्ञ थी। उसका विवाह प्रभास ऋषि से हुआ और उनसे विश्वकर्मा जी पैदा हुए। देवों का महान शिल्पी विश्वकर्मा पृथ्वी का प्रथम शिल्पाचार्य था। ब्रह्मा जी को प्रथम विमान बनाकर विश्वकर्मा जी ने दिया विश्वकर्मा-शिल्पशास्त्र का कर्त्ता एवं समस्त देवों का आचार्य है, आठों प्रकार की ऋद्धि-सिद्धियों का जनक है। प्रभास ऋषि का पुत्र और महर्षि अंगिरा के ज्येष्ठ पुत्र देवगुरु बृहस्पति का भांजा है।

विश्व को प्राचीनतम ग्रन्थ वेदों से ऋषियों द्वारा रचित ज्ञान मिला। महर्षि अंगिरा ने अथर्ववेद की रचना की, जिसका उपवेद अर्थवेद यानि शिल्प शास्त्र है, जिसमें सारे शिल्प- विज्ञान का वर्णन है। इसमें सुई से लेकर विमान निर्माण तक की विद्या का ज्ञान हैं। इसी वंश में ऋषि विश्वकर्मा हुए, जिन्होंने मानव कल्याण और भूमंडल की रचना को शिल्प विज्ञान के आविष्कार किये। वेदों में विश्वकर्मा जी की महिमा के अनेक मंत्र है।
वाल्मीकि रामायण में गुरु वशिष्ठ शिल्प कर्म में लगे शिल्पियों को यज्ञकर्म में व्यस्त बताकर उनकी पूजा का आदेश देते है तथा ऋग्वेद में विश्वकर्मा जी को धरती तथा स्वर्ग का निर्माता कहा है। यजुर्वेद में महर्षि दयानंद सरस्वती के भाष्य में कहा गया है कि विश्व के सभी कर्म, जिनके अपने किये होते है, ये वही विश्वकर्मा है।
शिल्प-संहिता के 18वें अध्याय में वर्णन है कि मनु के आग्रह पर विश्वकर्मा जी ने दूरदर्शन (दूरबीन)का अविष्कार किया था। संसार में मिस्र के पिरामिड, अजंता की गुफाएं, चीन की दीवार, आगरा का ताजमहल, पीसा की मीनार, वियना के मंदिर आदि के निर्माणकर्ता ऋषि विश्वकर्मा के वंशज है। विश्वकर्मा जी के पांच पुत्र हुए, जो विज्ञानाचार्य थे। मनु, मय, त्वष्ठा, शिल्पी और देवज्ञ। मय नामक शिल्पी ने युधिष्ठिर का महल बनाया था, जिसमें जल की जगह थल तथा थल के स्थान पर जल दृष्टिगोचर होता था। योगिराज श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र, रामायणकालीन पुष्पक विमान, दधीचि की हड्डियों से अमोघ शास्त्र बनाने वाले विश्वकर्मा जी थे। श्रीराम के लिए समुंद्र पर पुल बांधने वाले नल और नील विश्वकर्मा थे, जो सर्वविदित है।
भाप इंजन का अविष्कारक जेम्सवाट विश्वकर्मा पुत्र था। बिजली बल्ब का अविष्कार बढ़ई के बेटे एडिसन ने किया। फ्रायड लुहार का बेटा था। डायनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल लुहार का कार्य करता था। महान दार्शनिक सुकरात तथा दास प्रथा को खत्म कर अमेरिका का राष्ट्रपति बने अब्राहम लिंकन बढ़ई के घर जन्में थे। आदि शंकराचार्य, शिक्षा ऋषि ‘पदम् भूषण’वीतराग स्वामी कल्याणदेव, गीता प्रेस साहित्य के रचयिता पूज्य रामसुख दास जी और क्रांतिकारी व देशभक्त भजनोपदेशक आर्य सन्यासी स्वामी भीष्म महाराज, गायत्री परिवार के संस्थापक श्री राम शर्मा आचार्य विश्वकर्मा वंश में जन्मी महान विभूतियां है। विश्वकर्मा समाज मनुर्भवः का पालन करते हुए वैदिक पथ पर चलता रहे। शिल्प विज्ञान एवं चरित्र निर्माण से भारत को गौरवांवित करता रहे। नव पीढ़ी तकनीकी शिक्षा, सदाचार और देशभक्ति का मूलमंत्र जीवन में अपनाये।

इस अवसर पर आचार्य मनोज कुमार यज्ञकर्ता, यजमान सतपाल विश्वकर्मा सधर्मपत्नि सुनीता सिंह, हरिसिंह विश्वकर्मा पूर्व नायब तहसीलदार, मास्टर विनोद विश्वकर्मा, रूपचंद विश्वकर्मा, सतप्रकाश विश्वकर्मा , सुंदर विश्वकर्मा, रोहताश विश्वकर्मा, रविदत्त विश्वकर्मा, रमेश विश्वकर्मा, देवदत्त विश्वकर्मा, ओमबीर विश्वकर्मा, राजेन्द्र पाल विश्वकर्मा पूर्व जे.ई., राजकुमार विश्वकर्मा, दिनेश विश्वकर्मा, रामकुमार विश्वकर्मा, अजबसिंह विश्वकर्मा, सचिन विश्वकर्मा, धर्मेन्द्र विश्वकर्मा, पवन ठेकेदार, बिजेन्द्र विश्वकर्मा, विक्रम विश्वकर्मा, राहुल विश्वकर्मा, गुरमीत विश्वकर्मा, प्रशांत विश्वकर्मा, सतीश विश्वकर्मा, राहुल विश्वकर्मा, एडवोकेट जॉनी, मनोज विश्वकर्मा, भरतसिंह विश्वकर्मा, बिजेंद्र विश्वकर्मा, प्रताप सिंह, राजकुमार विश्वकर्मा, सुभाष विश्वकर्मा, सुभाष विश्वकर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।

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