सृष्टि के प्रथम वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता, अभियन्ता, खगोलशास्त्री एवं शिल्पाचार्य हैं भगवान विश्वकर्मा

गाज़ियाबाद। हिण्डन तट गाजियाबाद स्थित भगवान विश्वकर्मा मन्दिर मे विश्वकर्मा वंशजो द्वारा सनातन वैदिक हिन्दू संस्कृति के अनुसार भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर पं0 विवेकानंद शर्मा ने बताया कि भारतीय सनातन वैदिक हिन्दू धर्म संस्कृति में भगवान विश्वकर्मा शिल्पदेव तथा शिल्प के आचार्य हैं। वे सृष्टि के प्रथम वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता, अभियन्ता, वास्तुविद, सृजनकर्ता, विकासकर्ता तथा सभ्यता का ग्यान देने वाले देव हैं। वैदिक हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने के दिन भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि को सभ्यता का तकनीकी ज्ञान दिया था तथा जीव मात्र का ज्ञान विकास किया था। इसीलिए सत्रह सितम्बर को उनकी पूजा की जाती है।

भगवान विश्वकर्मा ने ही ब्रह्मलोक, विष्णुलोक, शिवलोक, अमरावती आदि की रचना की। सभी देवी-देवताओं को उनकी मर्यादा के अनुसार आवास तथा अस्त्र-शस्त्र निर्मित कर दिये जिसमें भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, शंकर का त्रिशूल, यमराज का काल दण्ड, इन्द्र का वज्र आदि प्रमुख हैं। इस दुनिया में मकान, सड़क, उपकरण, कम्प्यूटर, मोबाईल आदि सभी की विधा के प्रदाता भगवान विश्वकर्मा ही हैं। भूमण्डल में सभी धातुओं की खोज उन्होंने ही की थी। भगवान राम, श्रीकृष्ण, महादेव आदि देवों ने समय-समय पर उनकी उपासना कर मनोवांछित वस्तुएं प्राप्त की थी।

भगवान विश्वकर्मा के वंशज नल-नील द्वारा रामसेतु का निर्माण किया गया था जिसमें विशेष प्रकार के तैरने वाले शिला प्रयोग किये गये थे। इसलिए भगवान विश्वकर्मा विशेषकर कलयुग या मशीनी युग के सिद्धदेव हैं। उनकी उपासना से विश्व तकनीकी ज्ञान में सर्वश्रेष्ठ बन सकता है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा शिल्पदेव के रूप में अधिक फलीभूत होती है। पूजन समारोह में हवन-यज्ञ के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया तथा सरकार से 17 सितम्बर को भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा के अवकाश की मांग की गई। क्योंकि देश में लगभग पंद्रह करोड़ विश्वकर्मावंशी तथा लगभग पचास करोड़ तकनीकी व्यवसाय में लगे इन्जीनियर, वास्तुविद, भवन निर्माण ठेकेदार, कारीगर, शिल्पी, मिस्त्री, फोरमैन, कम्पयूटर व्यवसाय आदि कार्यो में कार्यरत लोग भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा-अर्चना इस दिन करते हैं।

इस अवसर पर आदित्य धीमान, यशपाल धीमान, नित्यानन्द, वशिष्ठ, नरेन्द्र पांचाल, उमाशकर शर्मा, ओ0पी0 शर्मा, अम्बरीष धीमान, बालेशवर पांचाल, सुखपाल पांचाल, अजय शर्मा, बिजेन्द्र धीमान आदि प्रमुख समाज सेवी उपस्थित रहे। शान्ति पाठ के उपरांत कार्यक्रम का समापन किया गया।

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