जनजागृति चिन्तन शिविर में बोले पूर्वमंत्री, विश्वकर्मा समाज को तोड़ने की हो रही साजिश

अहमदाबाद। विश्वकर्मा समाज का सत्ता और राजनीति में भागीदारी के बिना विकास सम्भव नहीं है। विश्वकर्मा समाज को जनसंख्या के अनुसार लोकसभा राज्यसभा विधानसभा और सरकार में हिस्सेदारी देनी होगी। केन्द्र व प्रदेश की सरकारों को विश्वकर्मा समाज की मांगो को स्वीकार करना होगा अन्यथा समाज एकजुट होकर फैसला लेगा। विश्वकर्मा समाज को तोड़ने के लिये बड़ी साजिश हो रही है, इससे सावधान रहने की जरूरत है। विश्वकर्मा समाज की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं होगी। उक्त बातें अहमदाबाद के नरोडा रोड के उदय ग्रीन पार्टी प्लाट में आयोजित प्रान्तीय विश्वकर्मा प्रतिनिधि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्वमन्त्री राम आसरे विश्वकर्मा ने कही। श्री विश्वकर्मा ने कहा कि हमें भगवान विश्वकर्मा और उनके वंशजों के इतिहास और उनके महत्व को जन-जन तक पहुंचाना होगा। विश्वकर्मा समाज के वास्तविक स्वरूप और पहचान को लोगों के बीच में बताना होगा ताकि लोगों के अन्दर से हीनता की भावना निकल सके और लोग स्वाभिमानी होकर जी सकें।


श्री विश्वकर्मा ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा ही हमारे आराध्य देव हैं और इन्हीं से हमारी पहचान हैं। 17 सितम्बर की भगवान विश्वकर्मा की पूजा हमारे लिये गौरव और सम्मान से जुड़ा है। हमने उत्तर प्रदेश में सपा सरकार के दौरान 17 सितम्बर को विश्वकर्मा पूजा का सार्वजनिक अवकाश घोषित कराकर विश्वकर्मा समाज का सम्मान पूरे देश में बढाया था। मगर भाजपा सरकार ने उसे निरस्त कर विश्वकर्मा भगवान और समाज का अपमान कर दिया। भगवान विश्वकर्मा और उनके वंशजो को आदिकाल से ही देश और दुनिया के विकास तथा तकनीकी एवं इंजीनियरिंग के निर्माण क्षेत्र में बड़ा योगदान रहा है। सूचना क्रान्ति के जनक सैम पित्रोदा व सरदार पटेल के मूर्ति के प्रारूपकार, वास्तुकार राम वी सुतार तथा साइकिल के आविष्कारक अस्ट्रेलिया के मैकमिलन तथा जापान में होंडाकार के आविष्कारक साइचिरो होंडा सभी विश्वकर्मा समाज के ही थे। देश का विकास और निर्माण विश्वकर्मा समाज से ही प्राम्भ हुआ। अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन और भारत के राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह विश्वकर्मावंश में पैदा होकर विश्वकर्मा समाज के नाम को आगे बढ़ाया, परन्तु आज विश्वकर्मा समाज की राजनैतिक भागीदारी शून्य है।देश की लोकसभा, विधानसभा और सरकार में विश्वकर्मा समाज के विधायक, सांसद व मन्त्री नहीं हैं जिसके कारण विश्वकर्मा समाज विकास की दौड़ में पीछे रह गया। हमारी हैसियत मालिक से मजदूर बनकर रह गयी। उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार में मुलायम सिंह यादव ने रामआसरे विश्वकर्मा को उच्चशिक्षा राज्यमन्त्री बनाकर सरकार में भागीदारी दी थी और अखिलेश यादव ने पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाकर सम्मान बढ़ाया था। श्री विश्वकर्मा ने पूछा कि अगर उत्तर प्रदेश में विश्वकर्मा समाज का व्यक्ति विधायक और मन्त्री बन सकता है तो गुजरात और अन्य राज्यों में विश्वकर्मा समाज के व्यक्ति को मन्त्री और विधायक क्यों नहीं बनाया जा सकता। देश व प्रदेश की सरकारों ने विश्वकर्मा समाज के विकास के लिये नीतियां और योजनाएं नहीं बनायी। हमारी मांग है कि केन्द्र सरकार 17 सितम्बर विश्वकर्मा पूजा दिवस पर सरकारी अवकाश घोषित करे। केन्द्र सरकार करीगरों की उन्नति के लिये विश्वकर्मा कारीगर आयोग तथा कारीगर विकास बोर्ड का गठन करे।


सरकार विश्वकर्मा टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय तथा छात्रावास का निर्माण कराये। वंश परम्परागत कुशल कारीगरों के पुश्तैनी रोजगार तथा सामूहिक विकास के लिये छोटी-छोटी जीआईडीसी 5एचपी का सब्सिडी बिजली कनेक्शन 5 लाख बिना गारन्टी ब्याज रहित लोन तथा गरीब कारीगरों के लिये सरकार निशुल्क ग्रामसभा की जमीनो का आवंटन करे। सरकार वंश परम्परागत कुशल कारीगरों को आईटीआई के समतुल्य प्रमाणपत्र जारी करे ताकि उन्हें सरकारी नौकरियों में भर्ती की जा सके। आरा मशीनों का लाइसेंस विश्वकर्मा समाज के लोगो को दिया जाय। सरकार विश्वकर्मा समाज को उनकी जनसंख्या के अनुरूप लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और सरकार में हिस्सेदारी देने का काम करे। सरकार हमारे लोहे और लकड़ी के कारोबार और रोजगार को विकसित करने के लिये कानून बनाये। सरकारी योजनाओं में विश्ववकर्मा समाज को आबादी के अनुसार भागीदारी दी जाय। आरक्षण के तहत विश्वकर्मा समाज के युवकों को नौकरी व रोजगार दिया जाय।


श्री विश्वकर्मा ने सरकार से मांग की कि निर्माणाधीन सरकारी संस्थाओं और भवनों का नामकरण भगवान विश्वकर्मा के नाम पर किया जाय। विश्वकर्मा समाज के गरीब लोगों के प्राथमिकता और उनकी आबादी के आधार पर सरकारी पेंशन, आवास व अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करायी जाय। सरकार द्वारा दी जा रही सभी सुविधाओं में विश्वकर्मा समाज की प्राथमिकता तथा आबादी के अनुरूप हिस्सेदारी तय किया जाय। श्री विश्वकर्मा ने कहा कि हम अनेक संगठनों, संस्थाओं और पार्टियों में बंटे और बिखरे होने के कारण एकजुट नहीं हो सके। आज आवश्यकता है कि सभी विश्वकर्मावंशीय पांचाल, जांगीड़, सुथार, गज्जर आदि एकजुट होकर एक मंच पर आयें। कहा कि भाजपा राज में विश्वकर्मा समाज के ऊपर लगातार उत्पीड़न और अत्याचार हो रहा है। उत्तर प्रदेश में उन्नाव की विश्वकर्मा समाज की बेटी को बलात्करियों ने जिन्दा जला दिया। सहारनपुर और कुशीनगर में विश्वकर्मा समाज के तीन पत्रकारों की हत्या कर दी गयी। न तो सरकार सुनवाई कर रही है और न ही पुलिस कोई प्रभावी कार्यवाही कर रही है। श्री विश्वकर्मा ने सभी नेताओं से अपने अधिकारों को लेने के लिये एकजुट होने पर जोर दिया। आह्वान किया कि आप सभी समाज के सम्मान और सुरक्षा के लिये हमारा साथ दें ताकि भविष्य में विश्वकर्मा समाज के सम्मान और स्वाभिमान की लड़ाई लड़ी जा सके और उनको हक व अधिकार दिलाया जा सके।


कार्यक्रम की अध्यक्षता महात्मा अमरदासबापू तथा संचालन राष्ट्रीय महासचिव कालूराम लोहार ने किया।कार्यक्रम के संयोजक धनजी भाई पांचाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।कार्यक्रम को सन्तश्री केवलानन्द सरस्वती, कथावाचक रमेश भाई पांचाल, हैदराबाद से एन0बी0 राजशेखर, विधायक जगदीश भाई पांचाल, भाजपा नेता भगवान राम पांचाल, ओबीसी नेता भरत सुथार, विजयवाड़ा से प्रसाद चारी, दिनेश भाई पांचाल, अमेरिका से एनआरआई रमेशभाई राठौड़, पत्रकार शिवकुमार विश्वकर्मा, पत्रकार ज्ञानेन्द्रभाई विश्वकर्मा, कारपोरेटर श्रीमती अलकाबेन, श्रीमती रामेश्वरीबेन कारपोरेटर सहित विश्वकर्मा समाज के गणमान्य हस्तियों ने सम्बोधित किया।

इस अवसर पर संजय विश्वकर्मा, रघुनाथ शर्मा, मयूर मिस्त्री, सुनील पांचाल, हरेश भाई गज्जर, शैलेष पांचाल, मयंक पांचाल आदि लोगों की गरिमामय उपस्थिति रही।

 

-शिव प्रकाश विश्वकर्मा

1 thought on “जनजागृति चिन्तन शिविर में बोले पूर्वमंत्री, विश्वकर्मा समाज को तोड़ने की हो रही साजिश

  1. श्रीमान जी आपका काम बहुत ही सराहनीय है
    जय विश्वकर्मा

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