क्या वाक़ई में अंधा-बहरा हो गया है भाजपा नेतृत्व??

आंखों में गुस्सा, हाथों में बैनर और तख्तियां, जुबां पर हरिभूषण ठाकुर-माफी मांगो! हरिभूषण ठाकुर को-बर्खास्त करो! जैसे नारे लगाते सड़कों पर उमड़ता विश्वकर्मा समाज का जनसैलाब एक नई इबादत लिखने को तैयार है। अब सवाल यही कि क्या वाकई भाजपा नेतृत्व बहरा हो गया है जिसे विश्वकर्मा वंशियों की गूंजती आवाज़ नहीं सुनाई दे रही है या भाजपा नेतृत्व अन्धा हो गया है जिसे विधायक हरिभूषण ठाकुर की करतूत नहीं दिखाई दी। भाजपा का यह बनावटी अन्धापन और बहरापन बहुत महंगा पड़ने वाला है।


अब तक सभी राजनीतिक दल विश्वकर्मा वंशियों को बेवकूफ बनाकर सिर्फ वोट लेने का काम करते आये हैं। इसका सबसे ज्यादा लाभ भारतीय जनता पार्टी ने लिया जो अपने को हिन्दूवादी पार्टी कहती है। यह वही हिन्दूवादी पार्टी है जिसके विधायक ने भगवान विश्वकर्मा का अपमान किया। पूरे देश में जगह-जगह आचरण विहीन विधायक के विरूद्ध विरोध प्रदर्शन हो रहा है फिर भी भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व पर अन्धापन व बहरापन सवार है।

एक सवाल और कि क्या भगवान विश्वकर्मा हिन्दू नहीं? यदि भगवान विश्वकर्मा हिन्दू होते तो शायद भाजपा इस पर विचार जरूर करती। परन्तु राजनीति के इन अन्धों को नहीं मालूम कि भगवान विश्वकर्मा देवताओं के भी देवता हैं। पूरी दुनिया में सिर्फ भगवान विश्वकर्मा ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनकी पूजा सभी धर्म और वर्ग के लोग करते हैं। देश-विदेश में पूज्यनीय देवताओं के भी देवता कहे जाने वाले भगवान विश्वकर्मा का कोई अपमान करे और उनके वंशज चुप रहें, यह कदापि सम्भव नहीं।

विश्वकर्मा वंशीय समाज अब तक सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक उपेक्षा बर्दाश्त करता आया है, परन्तु भगवान विश्वकर्मा का अपमान अब बर्दाश्त के बाहर है। विधायक हरिभूषण ठाकुर द्वारा भगवान विश्वकर्मा पूजा के ही दिन भगवान विश्वकर्मा की फोटो में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मुखड़ा लगाकर विश्वकर्मा के रूप में मोदी की पूजा की गई जो अति निन्दनीय है।

भगवान विश्वकर्मा का स्थान कोई मानव ले ही नहीं सकता। इस दुःसाहसिक कृत्य के लिये 12 दिन बाद भी न तो विधायक ने माफी मांगी और न ही भाजपा नेतृत्व ने विधायक के विरुद्ध कोई कार्यवाही किया। इससे यह साफ है कि पूरी की पूरी भाजपा विधायक हरिभूषण ठाकुर के कृत्यों का समर्थन कर रही है। फिलहाल विधायक हरिभूषण ठाकुर और भारतीय जनता पार्टी को यह हठधर्मिता बहुत महंगी पड़ने वाली है।

जागरूकता के शिखर की तरफ अग्रसर विश्वकर्मा समाज इन हठधर्मियों से इस अपमान का बदला लेने को आतुर है। भाजपा विधायक की इस करतूत से पूरे देश के विश्वकर्मा वंशियों में आक्रोश है। सभी जिलों में विरोध मार्च, प्रदर्शन, ज्ञापन और तहरीर देने का सिलसिला चल रहा है।

अभी तो विश्वकर्मा वंशीय अपने धैर्य और मर्यादा का परिचय दे रहे हैं परन्तु ‘बिन भय होई न प्रीति’ को देखते हुये कठोर निर्णय लिया जा सकता है। इतना ही नहीं इसका असर आगामी कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी पड़ सकता है।

-कमलेश प्रताप विश्वकर्मा

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