यह कैसा सौभाग्य?

आजमगढ़। हर घर को रोशनी देने के लिये केन्द्र सरकार के सहयोग से चल रही ‘सौभाग्य’ योजना ने बड़े पैमाने पर गरीबों का भाग्य ही बिगाड़ दिया है। सौभाग्य योजना को अमलीजामा पहनाने और उसकी सफलता के लिये सरकार अरबों रूपये प्रचार में खर्च कर रही है। वहीं इस योजना के तहत घर—घर तार—खम्भा व मीटर लगाने वाली फर्मों ने अनगिनत गरीब परिवारों के माथे पर चिन्ता की लकीरें खींच दी है। ठेकेदारों व उनके कर्मियों ने योजना में ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के लिये ऐसा खेल खेला है कि योजना की धज्जियां उड़ रही हैं।
सौभाग्य योजना की धज्जी उड़ाने व गरीबों के साथ चिन्ताजनक खिलवाड़ करने का एक उदाहरण आजमगढ़ जिले का भी है। जिले के निजामाबाद तहसील क्षेत्र के तहबरपुर विद्युत उपखण्ड अन्तर्गत इब्राहिमपुर गांव है। गांव में दूसरे के नाम पर आवण्टित बिजली का मीटर मलिन बस्तियों में लगा दिये गये हैं। इतना ही नहीं दूसरे के नाम का बिजली का बिल भी मलिन बस्ती के लोगों को भेज दिया गया है और उसे जमा करने के लिये उन पर दबाव भी बनाया जा रहा है।
सौभाग्य योजना को मूर्त रूप दे रहे ठेकेदारों और उनके कर्मियों का एक और कारनामा सामने आया है जो स्तब्ध कर देने वाला है। उसी इब्राहिमपुर की मलिन बस्ती में करीब 15 किलोमीटर दूर मदहसिया गांव निवासी व्यक्ति के नाम का मीटर लगा हुआ है। एक बात और बता दूं कि इस मलिन बस्ती में बिजली का मीटर लगाने के लिये खम्भे न लगाकर बांस—बल्ली के सहारे तार लगाये गये हैं जो आये दिन दुर्घटना को दावत दे रहे हैं।
विद्युत विभाग के इस कारनामे की क्षेत्र में जमकर भर्त्सना हो रही है। लोग उर्जामन्त्री श्रीकान्त शर्मा पर भी इन कारनामों की अनदेखी करने का आरोप लगा रहे हैं। इब्राहिमपुर निवासी युवा समाजसेवी धर्मेन्द्र विश्वकर्मा ने प्रदेश के मुख्यमन्त्री से उचित कार्यवाही की मांग करते हुये दोषियों के विरूद्ध कठोर कार्यवाही की मांग किया है।

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