सुदिव्य कुमार की जीत से पूरे देश के विश्वकर्मा समाज में हर्ष

रांची। झारखण्ड में सम्पन्न हुये विधानसभा के चुनाव में गिरीडीह से झामुमो प्रत्याशी सुदिव्य कुमार उर्फ सोनू विश्वकर्मा की विजय से पूरे देश के विश्वकर्मा समाज में प्रसन्नता है। समाज के लोग रोमांचित हैं कि उनका एक भाई सत्तारूढ़ दल के प्रत्याशी हो हराकर अप्रत्याशित सफलता प्राप्त की है।
सुदिव्य कुमार ने दस साल बाद गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में झामुमो प्रत्याशी के रूप में एक बार फिर वापसी की है। इस चुनाव में झामुमो का सिक्का शहर से लेकर गांव तक चला है। उनकी जीत के पीछे यह एक बड़ा कारण रहा है। झामुमो मुस्लिमों के साथ-साथ शहरी मतदाताओं को गोलबंद कर अपने पक्ष में करने में सफल रहा। इसने भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी करने में सफलता हासिल की है। साथ ही मजबूती और एकजुटता के साथ महागठबंधन के चुनाव लड़ने से भी सोनू की जीत की राह आसान हुई है।
सुदिव्य कुमार ने 15 हजार से ज्यादा मतों से जीतकर उन लोगों के मुंह पर ताला लगा दिया है, जो लोग कहा करते हैं कि विश्वकर्मा समाज का व्यक्ति चुनाव नहीं जीत सकता। विश्वकर्मा समाज के लोग चुनाव जीत सकते हैं बस राजनीतिक पार्टियां कम आबादी बताकर टिकट नहीं देती हैं। सुदिव्य की जीत ने विश्वकर्मा समाज की राजनीतिक इच्छाशक्ति को और प्रबल कर दिया है।

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