राज्यसभा सांसद रामचन्द्र जांगड़ा ने राज्यसभा में उठाया बिहार लोहार जनजाति का मुद्दा

दिल्ली। राज्यसभा सांसद रामचन्द्र जांगड़ा ने बिहार लोहार जनजाति का मुद्दा राज्यसभा में उठाया। उन्होंने बड़ी बेबाकी और मजबूती से अपनी बात मात्र डेढ़ मिनट से भी कम समय में सदन पटल पर रख दी। सांसद ने कहा कि देश में जब अंग्रेजों का शासन था तो अधिकारीगण अंग्रेजी में महेन्द्र को महेन्द्रा, राजेन्द्र को राजेन्द्रा कहकर सम्बोधित करते थे। ठीक उसी तरह ‘लोहार’ को ‘लोहारा’ कहते थे।

लोहार जाति को 1950 से अनुसूचित जनजाति के आरक्षण का लाभ मिल रहा था जो 2006 में लोहार को लोहारा लिखने के कारण बन्द हो गया, जबकि लोहारा कोई जाति नहीं है। बिहार के लोहार समुदाय ने कई वर्षों तक लोहारा को लोहार शब्द सम्बोधित किये जाने व पुनः आरक्षण का लाभ दिये जाने की लड़ाई लड़ी। 2016 में दोबारा लोहार शब्द अंकित किया गया जिस पर राष्ट्रपति की भी मुहर लग गई।

सांसद रामचन्द्र जांगड़ा ने बड़ी मजबूती से अपनी बात रखते हुये कहा कि राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद भी भारत सरकार का जनजाति मन्त्रालय संशोधित सूची जारी नहीं कर रहा है जिसकी वजह से बिहार का लोहार समुदाय आरक्षण के लाभ से वंचित है। उन्होंने सदन के माध्यम से भारत सरकार से मांग किया कि जनजाति मन्त्रालय की तरफ से यथाशीघ्र लोहारा की जगह लोहार शब्द अंकित कर सूची जारी किया जाय।

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