डॉ0 नरेन्द्र शर्मा की हुई पदोन्नति, बने प्रधान आयकर आयुक्त

झज्जर (रामभगत शर्मा)। विनम्र स्वभाव के धनी, मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण, समाज के प्रति समर्पित तथा माता-पिता के श्रवण भक्त डॉ0 नरेन्द्र शर्मा ने कठिन परिश्रम, सतत् साधना और कड़ी मेहनत तथा पुरुषार्थ के बल पर ही आयकर विभाग में एक प्रतिष्ठित पद हासिल किया है। वह आयकर विभाग के आयुक्त से पदोन्नति के पश्चात आयकर विभाग में प्रधान आयुक्त के पद पर आसीन हुए हैं। जांगिड़ समाज को उन पर गर्व है। सहनशीलता और विनम्र स्वभाव की प्रतिमूर्ति डॉ0 नरेंद्र शर्मा हरियाणा के समाज के पहले अखिल भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं जिन्होंने यह विशेष उपलब्धि हासिल की है।

दुनिया की चकाचौंध से दूर अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित डॉ0 शर्मा एक साधारण परिवार में जिला झज्जर के गांव सिलाना में माता श्रीमती रेवती देवी की कोख से और पिता लेखराम जांगिड़ के घर पैदा हुए। डॉ0 नरेन्द्र शर्मा की प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव सिलाना जिला झज्जर में ही हुई, उसके पश्चात दसवीं कक्षा गांव दादनपुर से उत्कृष्ट श्रेणी में पास की। वह पड़ोस के गांव में पैदल ही स्कूल आया-जाया करते थे।उसके पश्चात उन्होंने हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार से पशु-चिकित्सा विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और इसी दौरान उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर दी, और परमात्मा की सद्कृपा और माता-पिता के आशीर्वाद से प्रथम प्रयास में ही उन्हें सफलता हाथ लगी और वर्ष 1990 में उन्होंने आयकर विभाग में सहायक आयुक्त के पद पर अपनी नौकरी की शुरुआत की। उसके पश्चात निरन्तर प्रगति की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए आज प्रधान आयकर आयुक्त जैसे प्रतिष्ठित पद पर पहुंचे हैं।

उनके पिता लेखराम जांगिड़ सरकारी स्कूल में एक प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रहे हैं। यद्यपि एक स्कूल के प्रवक्ता की आय इतनी अधिक नहीं थी, लेकिन पिता की उत्कृष्ट अभिलाषा ने अपने पांचों बच्चों के साथ ही अपने भाई के बच्चों को भी उच्च शिक्षा दिलाने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखी। अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने के लिए पैसे का चाहे अभाव रहा हो, लेकिन तीनों भाइयों और दोनों बहनों को उच्च शिक्षा दिलवाने में कोई कंजूसी नहीं की और अपने पिता होने के दायित्व का भली-भांति निर्वहन किया।

मां श्रीमती रेवती देवी का भी भाई- बहनों को उच्च शिक्षा दिलवाने में अमूल्य योगदान रहा है। खुद पैसे के अभाव में रहते हुए भी अपनी बचत के पैसों से अपने पुत्रों और पुत्रियों की हर जरूरत को पूरा किया और यही कारण रहा कि डॉ साहब के बड़े भाई सुरेन्द्र जांगिड लोक निर्माण विभाग से उप मण्डल अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं और छोटे भाई डॉ0 हरेंद्र शर्मा ने एमबीबीएस व एमडी पास की है। प्रारंभ से ही डॉक्टर नरेन्द्र शर्मा, जन सेवा के माध्यम से लोगों की सेवा करना चाहते थे । सन् 1990 बैच के भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी डॉ0 नरेन्द्र अब तक हिसार, अमृतसर, दिल्ली, बड़ोदा सूरत और मुम्बई सहित कई शहरों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। पिछले पांच सालों से वह ‌मुम्बई में आयकर आयुक्त के पद पर कार्यरत रहे हैं और अब उनकी पदोन्नति आयकर आयुक्त से प्रधान आयुक्त के पद पर हुई है और उनका स्थानांतरण मुम्बई से सूरत में हो गया है।

उन्होंने प्रधान आयुक्त आयकर विभाग में बीते 1 सितंबर को अपना नया कार्यभार ग्रहण कर लिया है। ‌डॉ0 नरेन्द्र से जो एक बार मिल लेता है उसको अपनेपन और आत्मीयता का अहसास होता है वह प्रशंसनीय है। उनमें जो अपनापन और समाज के उत्थान के प्रति जो प्रतिबद्धता है उसका मै कायल हो गया हूं और यह उपलब्धि केवल माता- पिता द्वारा दिए गए उच्च संस्कारों से ही सम्भव हो सकती है। डॉ0 साहब की सोच आम आदमी से कहीं ऊपर है और उनका मानना है कि गरीब और अमीर हमारी मानसिकता की उपज है। भगवान ने सबको एक समान बनाया है। व्यक्ति अपने व्यवहार और आचरण तथा कर्मों से महान बनता है न कि अपने धन और बल के आधार पर।

डॉ0 साहब की धर्मपत्नी श्रीमती इन्दू शर्मा भी साक्षात देवी का स्वरूप है। अहंकार और घमण्ड उनमें लेशमात्र भी नहीं है। ऐसा परिवार सौभाग्य से ही मिलता है। आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि डॉ नरेन्द्र शर्मा भविष्य में भी इसी प्रकार और पदोन्नति हासिल करके समाज का नाम इसी प्रकार से गौरवान्वित करते रहेंगे। हम उनके उज्जवल भविष्य की मंगल कामना करते हैैं।‌ ‌

-राम भगत शर्मा, चण्डीगढ़

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