प्रतापगढ़ के डॉ0 दिनेश विश्वकर्मा ने विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में बनाई जगह, बढ़ाया समाज का गौरव

प्रतापगढ़ (कुलदीप कुमार विश्वकर्मा)। मूलतः प्रतापगढ़ जिले के निवासी व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय दिल्ली में सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में बतौर प्रोफेसर कार्यरत डॉ0 दिनेश कुमार विश्वकर्मा का नाम दुनिया के शीर्ष 20 हजार वैज्ञानिकों में सम्मिलित किया गया है। शीर्ष वैज्ञानिकों में नाम सम्मिलित होने से जिले के समाजजनों में हर्ष का माहौल है। स्टैनफोर्ड विश्विद्यालय अमेरिका की हालिया रिपोर्ट के अनुसार विशेषज्ञता के विभिन्न क्षेत्रों में दुनिया के शीर्ष दो फीसद वैज्ञानिकों में बेल्हा क्षेत्र के चमरुपुर गांव निवासी प्रोफेसर डा0 दिनेश कुमार विश्वकर्मा को स्थान दिया गया है।

स्टैनफोर्ड विश्विद्यालय के प्रोफेसरों द्वारा उक्त डेटाबेस वैज्ञानिक पत्रिकाओं, पुस्तकों और सम्मेलनों की कार्यवाही का सबसे बड़ा सार है। इसी से उद्धरण डेटाबेस के आधार पर उन्होंने इन नामों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। डा0 दिनेश विश्वकर्मा का जन्म प्रतापगढ़ जिले के लक्ष्मणपुर विकास खंड के चमरुपुर गांव में हुआ है। वर्तमान में वह दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। यह भारत के प्रतिष्ठित तकनीकी विश्वविद्यालय में से एक है।

प्रोफेसर दिनेश विश्वकर्मा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इमेज प्रोसेसिंग के क्षेत्र में विश्व वैज्ञानिक के शीर्ष 2% में चित्रित किया गया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर विज्ञान के आगामी क्षेत्रों में से एक है। जिसमें कई वास्तविक जीवन के अनुप्रयोग हैं, जैसे कि स्वचालित बीमारी का पता लगाना, स्मार्ट कृषि, बुद्धिमान परिवहन प्रणाली, व्यक्तिगत आनलाइन शापिंग, बैंक और स्वायत्त कारें। प्रो0 दिनेश ने दुनिया के शीर्ष पत्रिकाओं में 100 से अधिक शोध लेख प्रकाशित किए हैं। अनुसंधान में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय दिल्ली द्वारा कई बार शोध उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उनका शोध क्षेत्र फेक न्यूज डिटेक्शन, मानव भावना विश्लेषण, मानव गतिविधि पहचान, जालसाजी का पता लगाना आदि है। इन दिनों, ये शोध क्षेत्र समाज के लिए बहुत लोकप्रिय और बहुत उपयोगी हैं। इन सभी का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।

हाल ही में उन्होंने ‘COVID-19 और छात्रों के शिक्षा, सामाजिक जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव” पर शोध किया है, जहां उन्होंने इस बात का विस्तृत विश्लेषण किया कि COVID-19 से छात्रों की शिक्षा कैसे प्रभावित हो रही है, यह बहुत लोकप्रिय रहा है। फिलहाल उनकी इस बड़ी कामयाबी से जहां गांव में खुशी का माहौल है वहीं उनके ससुराल विकास खंड कुंडा के चौंसा गांव में भी जश्न का माहौल है। डॉ0 एम0एल0 विश्वकर्मा, रामसूरत विश्वकर्मा, कुलदीप कुमार, अजय, विजय, दिलीप, प्रदीप विश्वकर्मा, रंजीत कुमार, दक्ष विश्वकर्मा आदि ने खुशी जताई है।

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