खूंखार नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा की पत्नी बनी समाज की पहरूआ

सोनभद्र। एक खूंखार नक्सली की पत्नी जिसे अपने नक्सली पति पर नाज था वह आज समाज की पहरूआ बन बैठी है। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली व दुनिया में उभरती उनकी छवि ने नक्सली के इस पत्नी को भी मुरीद बना दिया है।
राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण खूंखार नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा पिछले छह साल से जेल में बंद है वहीं पत्नी प्रधानमन्त्री के राष्ट्रीय अभियान स्वच्छता की पहरुआ बनकर गांव की सफाई करने के साथ ही स्वच्छता का संदेश दे रही है। उसके इस कार्य से प्रभावित होकर जिला प्रशासन ने उसे गांव की स्वच्छता टीम का लीडर बना दिया है।
बात हो रही ​है आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र के राब‌र्ट्सगंज ब्लाक के कम्हारडीह गांव के पुष्पा की। जो कभी यूपी और बिहार सरकार के लिए आतंक का पर्याय रहे हार्डकोर नक्सली जोनल एरिया कमाण्डर मुन्ना विश्वकर्मा की पत्नी है। पति के कृत्य से पुष्पा ने काफी सामाजिक बहिष्कार झेला। वर्ष 2012 में मुन्ना के गिरफ्तार होने के बाद उसने सोची कि अब कुछ ऐसा कार्य करें जिससे समाज में एक पहचान मिल सके। इसी के बाद प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छता अभियान चला जो पुष्पा को काफी रास आया। उसने सोचा कि इससे अच्छा कोई मौका नहीं मिलेगा। इसी से जुड़ें और गांव की सफाई करके ही एक अलग मिसाल कायम करें। इस दौरान उसने ग्राम प्रधान रिंकू यादव से आग्रह किया कि मैं भी अपने गांव की सफाई करना चाहती हूं, मुझे भी कोई जिम्मेदारी दें। इस दौरान ग्राम प्रधान ने उसे गांव को खुले में शौचमुक्त करने के लिए बनाई गई टोली में शामिल कर लिया। कुछ दिन में पुष्पा ने ऐसी छाप छोड़ी कि ग्राम प्रधान ने जिला पंचायत राज अधिकारी से बात करके उसे गांव की 50 महिलाओं की निगरानी समिति का लीडर बना दिया। अब वह हर दिन तड़के उठकर महिलाओं को एकत्र करने के साथ ही सीटी बजाते हुए गांव का भ्रमण करती है। गांव की सफाई के साथ लोगों को स्वच्छता को लिए जागरूक भी करती है। पुष्पा के कार्य से प्रभावित होकर लोग अब उसे सम्मान देने लगे हैं। उसके इस प्रयास से आज गांव ओडीएफ हो चुका है।
कैसे बदला विचार—
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन की जानकारी होने के बाद पुष्पा ने पहली बार 2016 में ग्राम प्रधान रिंकू यादव से मिली। उनसे कहा कि वह गांव की महिलाओं के लिए कुछ करना चाहती हैं। यह बात सुन ग्राम प्रधान कुछ देर के लिए तो हतप्रभ रहे लेकिन फिर उन्होंने उनसे गांव की महिलाओं को स्वच्छता के लिए जागरूक करने को कहा। इसके बाद पुष्पा ने एक-एक करके गांव की महिलाओं को अपने साथ जोड़ना शुरू किया। पुष्पा ने बताया कि शुरू के कुछ दिनों में उन्हें तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। गांव के लोग मुझसे बात करने से कतराते थे और खासकर महिलाएं तो डर के मारे घर के अंदर चली जाती थी। बावजूद इसके मैंने हार नहीं माना और निगरानी समिति जिसमें सिर्फ पुरुष रहते थे उनके साथ लोगों को खुले में शौच न जाने व नियमित गांव की सफाई करने के लिए जागरूक करने लगी। यह क्रम कुछ दिनों तक चला, इसके बाद एक-दो करके गांव की महिलाएं उनसे जुड़ती चली गईं।
पहले खुद के डर पर जीत की हासिल—
पुष्पा ने बताया कि स्वच्छता अभियान से जुड़ने से पहले वह खुद के डर से लड़ी। इसके बाद जब वह इस काम में उतरी तो फिर पीछे मुड़कर आजतक नहीं देखा। बताया कि गांव को ओडीएफ होने के बाद भी आज भी वह नियमित रूप से सुबह उठकर गांव की महिलाओं के साथ सफाई अभियान चलाती हैं। स्वच्छ भारत के समन्वयक अनिल केशरी बताते हैं कि पुष्पा की सक्रियता से आसपास के गांव में भी जागरूकता आई है। गांव की महिलाएं अब उसे आदर्श मानने लगी हैं।
बन गई लीडर—
जिला पंचायत राज अधिकारी आर0के0 भारती ने बताया कि खुले में शौचमुक्त गांव के लिए बनाई गई 50 महिलाओं की निगरानी समिति की पुष्पा लीडर हैं। उनके पीछे महिलाओं की टीम है जो स्वच्छता की अलख जगा रही है। अन्य गांवों की महिलाओं को भी प्रेरित करने के लिए उन्हें पुष्पा का उदाहरण दिया जाता है।

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