दोनो पैरों से दिव्यांग अवधेश विश्वकर्मा चारपाई पर लेटे-लेटे नौनिहालों को दे रहे निःशुल्क शिक्षा

प्रतापगढ़। अगर आपके अंदर कुछ कर दिखाने का जज्बा हो तो कोई भी कठिनाई आपका रास्ता नहीं रोक सकती। आपका हौसला हर कठिनाई को हरा सकता है। अपने जिजीविशा के दम पर प्रतापगढ़ के दिव्यांग अवधेश विश्वकर्मा दूसरों के लिए प्रेरणाश्रोत बन गए हैं। जी हां, हम बात कर रहे है विकास खंड कुंडा के रहवई बेला का इंदारा गांव निवासी अवधेश विश्वकर्मा की। अवधेश दोनों पैर से दिव्यांग हैं। सात भाइयों में छठे नंबर पर अवधेश का बीते वर्ष 2009 में एक्सीडेंट हो गया था। इसमें उनकी कमर की हड्डी टूट गई थी। इसके कारण वह तब से बिस्तर पर ही लेटे रहते हैं। उनकी गरीबी का यह आलम है कि सात भाइयों के बीच सिर्फ एक बीघा खेत है, वो भी पिता के नाम पर है। जबकि सभी भाई अलग अलग रहते हैं।

अवधेश को एक बेटी ममता (15) व एक बेटा शिवम (12) वर्ष है। यह सब अवधेश की दुश्वारियां बताने के लिए काफी हैं। लेकिन जब कोरोना के चलते दो वर्षों से स्कूल बंद हैं, तब अवधेश गांव के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देकर ऐसा नेक काम कर रहे हैं, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। जीवन में अपने पैरों पर खड़े होने की आश छोड़ चुके अवधेश ने तो इंटर तक की पढ़ाई की है। लेकिन कोरोना कॉल में नष्ट होती बच्चों की पढ़ाई अवधेश को नागवार गुजरी और उसने बिस्तर पर लेटे-लेटे ही बच्चों को निःशुल्क पढ़ाना शुरू कर दिया।

दो बच्चे से शुरू हुई अवधेश की पाठशाला में आज स्वास्तिक, अस्तित्व, रोहित, साक्षी, खुशबू, अभिषेक, नैंसी, सिखा, ममता, शिवम आदि लगभग एक दर्जन बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। पांच सौ महीने की दिव्यांग पेंशन पर गुजर-बसर करने वाले अवधेश इन बच्चों को पढ़ाकर काफी फक्र महसूस करते हैं। उनके घर पर रोजमर्रा के खर्च के लिए कमाने के नाम पर सिर्फ उनकी पत्नी नीलम देवी ही हैं, जो गांव में मजदूरी करके किसी तरह अवधेश की दवाई का खर्च व बच्चों के लालन-पालन का खर्च उठा रही हैं। (साभार)

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