अखिल भारतीय मारू लोहार समाज ने मनाई विश्वकर्मा जयन्ती

जालोर। अखिल भारतीय मारू लोहार समाज द्वारा समाज की धर्मशाला सुंधापर्वत पर भगवान विश्वकर्मा प्राकट्य महोत्सव मनाया गया। प्रातः 8:00 बजे से गणेश व भगवान विश्वकर्मा की स्थापना अखंड ज्योत के साथ की गई। हवन-यज्ञ, पूजा-अर्चना, महाआरती, एवं महाप्रसादी का भोग लगाया गया। बाद में गुजरात व राजस्थान से आए सैकड़ों पट्टी परगना के प्रमुख समाज बंधुओं ने धूमधाम से पर्व मनाया। उपस्थित लोगों ने हवन यज्ञ में आहुतियां दी। बाद में दोपहर को महाप्रसादी का आनंद लिया।


संस्था के अध्यक्ष कालूराम पडियार राजीकावास ने गत वर्ष 2019-20 के दरम्यान धर्मशाला के निर्माण कार्य एवं पूर्व में हुए कार्यक्रमों का लेखा-जोखा पेश किया।अगले वर्ष 2020-2021 में धर्मशाला निर्माण कार्य के बारे में चर्चा की गई। आगंतुक समाज बंधुओं ने रसीद बुक लेकर अपने-अपने पट्टी-परगना में चंदा इकठ्ठा कर समाज के धर्मशाला निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर अखिल भारतीय विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के राष्ट्रीय महासचिव कालूराम लोहार ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा हमारे आराध्य देव हैं, इन्हीं से विश्वकर्मा समाज की पहचान बनी है। भगवान विश्वकर्मा और उनके वंशजों का इतिहास जन-जन तक बताना होगा तभी हमारा समाज आगे बढ़ेगा। श्री कालूराम सुंधा पर्वत पर विश्वकर्मा जयंती महोत्सव के अवसर पर उपस्थित लोगों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 17 सितम्बर भगवान विश्वकर्मा पूजा दिवस का पर्व हमारे गौरव और सम्मान से जुड़ा है। भगवान विश्वकर्मा के पूजा दिवस को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। काफी समय से भाजपा सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग चल रही है। कालूराम ने कहा कि विश्वकर्मा समाज का गौरवमई इतिहास रहा है। सूचना क्रांति के जनक सैम पित्रोदा व सरदार पटेल की विशाल मूर्ति के प्रारूपकार, वास्तुकार वी. रामसुतार तथा साइकिल के आविष्कारक ऑस्ट्रेलिया के मैकमिलन तथा जापान में होंडाकार के आविष्कारक साईचिरो होंडा सभी विश्वकर्मा समाज के ही थे। सृष्टि की रचना के बाद देश और दुनिया का विकास और निर्माण विश्वकर्मा समाज से ही प्रारंभ हुआ था। अमेरिका के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन और भारत के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने विश्वकर्मावंश में पैदा होकर विश्वकर्मा समाज के नाम को आगे बढ़ाया। मगर आज विश्वकर्मा समाज की राजनीतिक भागीदारी शून्य है, इसलिए आज हम विकास की दौड़ में सबसे पीछे रह गए हैं। हमारी हैसियत एक निर्माणकर्ता से मजदूर बनकर रह गई है। पूरे देश में राष्ट्रीय पार्टियां विश्वकर्मा समाज के साथ राजनीति भागीदारी सुनिश्चित करने में सौतेला व्यवहार कर रही है और हमारे समाज के वोटों का दुरुपयोग कर रही हैं। हमारी मांग है कि सरकार विश्वकर्मा समाज को उनकी जनसंख्या के अनुरूप लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, बोर्ड व निगम, नगरपालिका, पंचायत स्तर पर और सरकार में भागीदारी और हिस्सेदारी सुनिश्चित करे।
केंद्र व राज्य सरकार वंश परंपरागत कारीगर समाज के उन्नति के लिए विश्वकर्मा कारीगर आयोग तथा विश्वकर्मा कारीगर विकास बोर्ड का गठन करे। सरकार वंश परंपरागत कारीगर समाज के बच्चों के लिए विश्वकर्मा टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय तथा विश्वकर्मा छात्रावास का निर्माण कराये। सरकार सरकारी संस्था और सरकारी भवनों का एवं मार्ग, चौक का नामकरण भगवान विश्वकर्मा के नाम पर नामांकन करे। कहा कि विश्वकर्मा समाज के अधिकार, सम्मान और गौरव को बचाने के लिए पूरे देश के विश्वकर्मा समाज को एकजुट होकर बड़ी सामाजिक ताकत और राजनीतिक ताकत बनानी होगी।
कार्यक्रम में मसराराम पचपदरा, बाबूलाल, जैसल, जैसाजी सोमता डीसा, हीराजी परमार मालोतरा, तुलसाजी डूटवा डिसा, जेठाजी भीयोना, महेंद्रजी दियोदर, रायचंदजी ईटाटा, बाबूजी थराद, बाबूजी, हेमाजी, चंपाजी देवाजी, हकाजी चौहान जड़ियाली लाखणी, रणछोड़जी मेडा, मूलाजी, हंसाजी माधाजी राठौड़ डोंगरा सांचौर, डॉ0 रामाराम रानीवाड़ा, गणपतजी गुंदाऊ, लाखाजी करवाड़ा, प्रभुजी तावीदर, धनजी दांतवाड़ा, डामराराम करडा, पिराजी मसराराम पंचैरी, मसराजी सिलासन, मोहनराम, जगदीशजी कागमाला, धनाराम धानसा मोमताजी शेरना, गणेशाजी हड़मतिया, आत्माराम रामपुरा, पूनमजी बागरा, अमराजी भीमपुरा, गंगाराम भाजना, खेताराम, भभूताराम मूडतरासिली, श्रवणकुमार खानपुर, सकाराम, हीराराम जुंजाणी, जोगाराम जेरण, मुकनाराम नींबाउ, रेवाजी पुनासा, कालूजी नोरा, नारणाराम दांतिवास, हरजीराम कोमता, कांतिलाल, छगनलाल, वजाराम कोरा, परबताराम पादरा, शंकराराम, हीराराम पूराराम जैतू, श्रवण कुमार मेडक, परसाराम सिवाना, घेवाराम मुथला, जबराराम, उमाराम कांटोल और समाज के सैकड़ों समाज बंधुओं ने हवन में आहुति दी एवं कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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