11 वर्षीय प्रियंका विश्वकर्मा की जिन्दगी बचाने को दर—दर भटक रहे मां—बाप

भदोही। यूपी के भदोही में एक मां-बाप अपनी 11 साल की बीमार बेटी की जिंदगी बचाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। गोपीगंज की रहने वाली 11 साल की प्रियंका विश्वकर्मा के पेट में बड़ी आंत नहीं है। पैदा होने के बाद ऑपरेशन से मल जाने की नली तो बना दी गई थी लेकिन अब रोजाना 350 रुपया की दवा प्रियंका को लगती है लेकिन गरीब पिता इतने रूपये रोज नहीं जुटा पा रहा है। परिवार कर्ज में डूब चुका है और कहीं से इन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है।
जब प्रियंका का जन्म हुआ तो माता—पिता को जानकारी हुई कि प्रियंका के पेट में मल निकलने की नली नहीं है। वाराणसी के BHU में ऑपरेशन के बाद मल निकलने का रास्ता तो डॉक्टरों ने बना दिया लेकिन जब ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने जो कहा उससे इस मासूम के माता पिता के पैर के नीचे से जमीन खिसक गई। डाक्टरों ने कहा की रोजाना 350 रुपया की दवा की जरूरत प्रियंका को पूरी जिंदगी पड़ेगी। 11 साल से उसके माता -पिता किसी तरह दवा की व्यवस्था कर रहे हैं। पिता पेशे से जनरेटर मैकेनिक हैं, ऐसे में रोजाना इतने रूपये नहीं जुटा पाते हैं जिससे परिवार कर्जे में डूब चुका है। माता—पिता अधिकारियों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं। प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक मदद की गुहार के लिए एक बार नहीं कई बार पत्र और ऑनलाइन आवेदन भेजा जा चुका है, लेकिन कहीं से इन्हें मदद नहीं मिल सकी है।
बीमारी की वजह से प्रियंका शिक्षा से भी दूर है क्योंकि हर आधे घंटे में उसे शौच के लिए जाना पड़ता है इसलिए किसी भी स्कूल में उसका एडमिशन नहीं हो पा रहा है। प्रियंका के आलावा हरिचन्द्र के तीन बच्चे और हैं। प्रियंका के पिता पेशे से जनरेटर मैकेनिक है ऐसे में सीजन में ही काम मिलता है सीजन के बाद छोटा मोटा काम कर किसी तरह अपने परिवार को दो वक्त की रोटी और बेटी को दवा की व्यवस्था कर पा रहे है । एक गरीब परिवार की मासूम बेटी के माता पिता सबसे से गुहार लगा रहे है कि उसकी बेटी को बचा लिया जाये लेकिन अब उनकी कोई सुनने वाला नहीं है ।

(साभार— महेश जायसवाल)

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