ऐसा प्यारा खुशहाल हो अपना बिहार

अपना बिहार (लेखक- आशादीप शर्मा)

चारों तरफ हो हरियाली जिसके,
शुद्ध वायु हो जिनके आस-पास,
ऐसा स्वच्छ, सुंदर हो अपना बिहार।
जहाँ न हो कोई भेद-भाव,
आपस में हो सब एक समान,
ऐसा​ अतुल्य हो अपना बिहार।
जहाँ मिले जन – जन को शिक्षा,
रहे न कोई भी अज्ञान,
मिले जहाँ उन्हें रोजगार,
सुखी रहे उनका परिवार,
ऐसा साक्षर हो अपना बिहार।
जहाँ हो हर चीज इतनी सस्ती,
रहे न कोई भुखी बस्ती,
छत हो, वस्त्र हो जिनके तन पर,
मिले जहाँ लोगों​ को रोटी,
ऐसा परिपूर्ण हो अपना बिहार।
जहाँ न बिछड़े अपनों से कोई,
जहाँ न हो नारी का अपमान,
जहाँ न हो उन्हें भय किसी का,
ऐसा निर्भय हो अपना बिहार।
जहाँ हो रक्षा नारी अस्तित्व की,
मिले उन्हें मान-सम्मान,
ऐसा प्यारा खुशहाल हो अपना बिहार।
– आशादीप

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