आकांक्षा विश्वकर्मा ने एक ही साल में जीते 3 गोल्ड और 2 सिल्वर मेडल

भोपाल। मध्य प्रदेश के कटनी की आकांक्षा विश्वकर्मा ने इसी महीने जयपुर में हुई राष्ट्रीय घुड़सवारी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है। आकांक्षा मात्र 6 दिन की थी तब मां और 7 साल की हुई तो पिता गुजर गए। अनाथालय में घुड़सवारी सीखी और इस साल 2018 में ही 3 गोल्ड मेडल जीत लाई।


18 साल की आकांक्षा विश्वकर्मा कटनी की रहने वाली है। म0प्र0 घुड़सवारी अकादमी से प्रशिक्षण ले चुकी आकांक्षा ने इसी महीने हुई राष्ट्रीय घुड़सवारी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। सालभर में आकांक्षा का यह पांचवां पदक है। इनमें 3 गोल्ड, 2 सिल्वर शामिल है। जब आकांक्षा 6 दिन की थी, तभी उनकी मां का और 7 साल की हुई तो पिता का निधन हो गया। इसके बाद अनाथालय में रही। वहीं घुड़सवारी सीखी और अब सालभर में ही 3 गोल्ड मेडल जीत लिए। आकांक्षा ने अपने 18 वर्ष के जीवन यात्रा पर कुछ बातें शेयर किया है। प्रमुख अंश…
घोड़ों की देखभाल के साथ-साथ सीखी घुड़सवारी—
मैं बचपन के दिनों को तो याद ही नहीं करना चाहती। जब भी याद करती हूं डर जाती हूं। पहले मम्मी, फिर पापा गुजर गए। उनके जाने के बाद मैं चाचा-चाची के साथ रहने लगी। उन्होंने 5-6 साल तो मुझे ठीक से रखा, लेकिन फिर वे मुझे साथ नहीं रखना चाहते थे। मुझे हफ्तों तक कमरे में बंद रखते थे। खाना भी नहीं मिलता था। करीब सालभर यह सब सहने के बाद मोहल्ले के ही कुछ लोगों की मदद से मैं अनाथालय पहुंच गई। अनाथालय में 2 घोड़े थे। बच्चों को मनोरंजन के लिहाज से घुड़सवारी कराई जाती थी। मैं भी घुड़सवारी करने लगी। धीरे-धीरे खेल अच्छा होता गया। मैं 2014 में अनाथालय पहुंची थी। 2017 तक यहां रही। 3 साल तक मैंने घुड़सवारी का अभ्यास किया। जिन घोड़ों के साथ मैं घुड़सवारी सीखती थी, उनकी देखभाल भी मैं ही करती थी। मैं अच्छी घुड़सवारी करने लगी थी। तभी किसी ने मूुझे बताया कि म0प्र0 राज्य घुड़सवारी में प्रवेश के लिए अकादमी की चयन समिति भोपाल में टैलेंट सर्च कर रही है। मैंने वहां जाकर ट्रायल दिया और सेलेक्ट हो गई। अकादमी में कोच भागीरथ सर की ट्रेनिंग में साल भर में मेरी घुड़सवारी और निखर गई। इसके बाद ही मैंने एक साल में 2 स्टेट लेवल के और अब एक नेशनल लेवल का भी गोल्ड जीत लिया। -आकांक्षा

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