दिन में संभालते हैं चेयरमैन की कुर्सी, शाम होते ही वाहन रिपेयर में जुट जाते हैं महावीर जांगड़ा

हिसार। हिसार मार्केट कमेटी के प्रधान महावीर जांगड़ा दूसरों के लिए मिसाल हैं। वह दिन में तो चेयरमैन की कुर्सी संभालते हैं और शाम होते ही वर्कशॉप में गाडि़यों की रिपेयर में जुट जाते हैं। राजनीति से जुड़े लोगों के प्रति आमजन में जो धारणा है, वह हिसार मार्केट कमेटी चेयरमैन महावीर जांगड़ा को देखकर बदल जाती है। वह दिनभर मार्केट कमेटी के चेयरमैन के रूप में दफ्तर में रहते हैं और शाम पांच बजे से अपनी वर्कशाप में तेल और ग्रीस से सने कपड़ों में हाथ में रिंच लिए बस और ट्रकों के इंजन बांधते हुए नजर आते हैं। जिस पद पर वह हैं, चाहें तो अच्छी खासी आय कर सकते हैं, लेकिन इसे वह अनैतिक मानते हैं।


मार्केट कमेटी चेयरमैन महावीर जांगड़ा की हिसार ऑटो मार्केट में है ‘एमएस मोटर वर्क्‍स’ नाम से वर्कशाप है। श्री जांगड़ा सन् 1983 से ऑटो मार्केट में वाहनों की रिपेयरिंग का काम करते हैं। दो वर्ष पहले तक वह रोजाना सुबह अपनी ‘एमएस मोटर वर्क्‍स’ वर्कशाप पर आते थे और शाम को काम खत्म कर सेक्टर 14 स्थित अपने घर लौट जाते थे। अचानक एक दिन सूचना मिली कि प्रदेश सरकार ने उन्हें मार्केट कमेटी के चेयरमैन की जिम्मेदारी सौंपी है। कोई और होता तो उसका दिल बल्लियों उछलने लगता। मगर महाबीर पशोपेश में पड़ गए। अब दुकान कैसे देखेंगे। घर का खर्च कैसे चलेगा। पद का दुरुपयोग कर पैसे कमाना वह हेय मानते थे।
फिर उन्होंने रास्ता निकाला। दिनभर मार्केट कमेटी के दफ्तर में वहां का कामकाज निपटाते हैं। शाम को मैकेनिक वाली ड्रेस पहन वाहनों के इंजन की ओवर हालिंग में जुट जाते हैं। वह रात 11-12 बजे तक वर्कशाप पर अपने दोनों बेटे संदीप और मनोज के अलावा चार मिस्त्रियों के साथ वर्कशाप पर काम में जुटे देखे जा सकते हैं।
महाबीर जांगड़ा कहते हैं कि राजनीतिक कार्यकर्ता होने के कारण जो जिम्मेदारी उन्हें मिली है, वह समाज कार्य के लिए है। वह आपकी सुख सुविधा के लिए नहीं है। वह बताते है कि गुरुकुल घरौंडा की स्थापना करने वाले स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती सन 1962 में जनसंघ के टिकट पर करनाल लोकसभा सीट से सांसद बने। उन्होंने सरकारी आवास नहीं लिया और बाजार सीताराम, दिल्ली के आर्य समाज मंदिर से संसद तक पैदल जाते थे।
एक बार इंदिरा जी ने एक पांच सितारा होटल में मीटिंग बुलाई। वहां जब लंच हुआ तो स्वामी जी ने अपनी जेब से बाजरे की दो सूखी रोटी निकाली और खाने लगे। इंदिरा जी ने कहा, भोजन तो आप सांसदों के लिए ही परोसा जा रहा है तो उन्होंने कहा कि सरकारी धन से रोटी भला कैसे खा सकता हूं। हां, एक गिलास पानी और अचार लूंगा। उनका भुगतान भी स्वामी जी ने खुद किया था। जांगड़ा कहते हैं, मैं उन्हें आदर्श मानता हूं। इसलिए मैं तेल व ग्रीस से सने कपड़ों में खुद को देख कभी हीन भावना से ग्रस्त नहीं होता।

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