अपने अधिकारों और विकास के प्रति सजग हो रहीं तांबट समुदाय की महिलाएं

पुणे। महंगाई की वजह से बेहाल हु्आ समाज, घर में किसी को नौकरी नहीं, पारम्परिक व्यवसाय चरमरा गया पारिवारिक जीवन असहनीय और कमजोर हो रहा इसलिए तांबट समुदाय की महिलाओं ने सरकार के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया। चुनाव के दौरान वादे किये जाते हैं लेकिन इसे लागू नहीं किया जाता। समाज की मांगों को स्वीकार करने के लिए सरकार को मजबूर करेंगे, जरूरत पड़ी तो आन्दोलन करेंगे, संसद का घेराव करेंगे, ऐसी तांबट समुदाय की महिलाओं ने चेतावनी दी है। तांबट समुदाय की महिलाएं अपने घरों में जागरूकता पैदा करके समाज मे परिवर्तन के लिए काम कर रही हैं। तांबट समाज एकजुट विश्वकर्मा समुदाय की धारा का घटक है। शासन स्तर पर पांचो समाज को श्रेणियों में विभाजित किया गया है, लौहकार और शिल्पकार एनटी मे हैं, जबकि काष्ठकार, ताम्रकार और स्वर्णकार ओबीसी श्रेणी में हैं। तांबट समाज एक अल्पसंख्यक समुदाय है और विकास से कोसों दूर है।


यह समाज जो आर्थिक रूप से हाथ के कामों पर निर्भर है, बदलती तकनीक में भी अपने व्यवसाय को मजबूत बनाकर जीवन यापन कर रहा है। कुल आबादी की तुलना में सरकारी नौकरी में इस समूह की प्राथमिकता पर विचार करना महत्वपूर्ण है, ऐसा रजनी पाथरकर ने कहा। सरकारी योजनाओं की जानकारी समुदाय तक नहीं पहुंचती ऐसा प्रियंका म्हालणकर ने कहा। समुदाय को घरकुल जैसी योजना की सख्त जरूरत है, ऐशी मांग मीनल नगरकर, साक्षी मिस्किन, व अश्विनी तलेकर ने की। समुदाय के शिक्षित बेरोजगार नौकरी और व्यवसाय के लिए भटक रहे हैं। आज, युवा सीखने के लिए बाहर आ रहे हैं, लेकिन उन्हें सही दिशा देने की आवश्यकता है ऐसा प्रभावती आप्रे ने कहा। एकेला आदमी के साथ अपार मुद्रास्फीति, ने इसे घरबस्ती को चलाने के लिए एक कसरत बना दिया है। समाज में विकास स्थापित होने के लिऐ व्यवसाय शुरू करने के लिऐ सरकार को आर्थिक सहायता करनी चाहिए ऐसा अमृता आप्रे ने कहा। सरकार को समस्याओं का हल निकालना चाहिए, नारी शक्ति का सम्मान व उनकी राय का सम्मान करना सरकार का कर्तव्य बनता है। घर की समस्या का हल निकालेगा तभी समाज आत्म-पहचान बना पायेगा। जिस पार्टी ने समाज की मांगो का समर्थन किया है समाज उसी पार्टी को वोटिंग करेगा। वैदिक परम्परा का पालन करने वाला तांबट समाज वोट का मूल्य जानता है। वोटिंग का बहिष्कार करना बुद्धिमान लोगों का लक्षण नहीं है। समाज की महिलाओं ने अपना विचार व्यक्त किया कि यदि सरकार समाज के प्रश्न को अनदेखा करती है, तो समाज सरकार को मजबूर करेगा इसलिए समाज की महिला अपने बच्चों को प्रेरित कर रही हैं।
इस अवसर पर विमल रेघाटे, सुनंदा म्हालणकर, सुमन नगरकर, गीता म्हालणकर, नंदा गोमासे, मनीषा म्हालणकर, वैजयंती रेघाटे, शुभांगी नगरकर, सुमन आप्रे, अनसूया मिस्किन, रश्मी म्हालणकर, सुनिता आप्रे, शुभांगी पाथरकर, मीना दस्तुरकर, सोनाली म्हालणकर आदि महिला उपस्थित थी।

रिपोर्ट— भारत रेघाटे (ताम्रकार) पुणे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *