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'अगस्त क्रान्ति' के मौके पर 'विश्वकर्मा पूजा' अवकाश बहाली ​के लिये मशाल जुलूश

वाराणसी। ऐतिहासिक अगस्त क्रान्ति दिवस के अवसर पर ऑल इण्डिया यूनाइटेड विश्वकर्मा शिल्पकार महासभा के तत्वावधान में 'विश्वकर्मा पूजा' अवकाश बहाली ​के लिये मशाल जुलूश निकाला गया। अपने पूर्व घोषित कार्यक्रमानुसार विश्वकर्मा समाज ने शाम को टाउनहाल स्थित गांधी प्रतिमा से एक विशाल मशाल जुलूस निकाला जो लोहटिया, कबीरचौरा होते हुए लहुराबीर चौराहे पर आजाद पार्क पहुंचकर सभा में परिवर्तित हो गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं और युवक शामिल थे जो संगठन की टोपियां लगाए हुए हाथों में तख्तियां मशाल और धर्म ध्वजा लिए नारे लगाते हुए चल रहे थे। जुलूस का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक कुमार विश्वकर्मा ने इस अवसर पर सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सबका साथ—सबका विकास का नारा देने वाली केन्द्र और प्रदेश सरकार की कार्यशैली से सभी वर्ग के लोगों में घोर निराशा है। रोजी रोटी के संकट से जूझ रहे परम्परागत कामगार, शिल्पकार और श्रमिक वर्ग सबसे ज्यादा सरकार की गलत नीतियों एवं विसंगतिपूर्ण जीएसटी का शिकार होकर बेकारी और भुखमरी के कगार पर हैं।
उन्होंने बताया कि जीएसटी के चलते पिछले दो महीनों से कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं का लेन-देन और विक्रय ठप है जिसके चलते उनके परिवारों में भुखमरी की नौबत आ गई है तथा वह कर्जदार होकर आत्महत्या करने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं इस सरकार ने करोड़ों लोगों के आराध्य भगवान विश्वकर्मा को महापुरुषों की श्रेणी में लाकर शासकीय अवकाश रद्द कर उनकी धार्मिक आस्था को अपमानित करने के साथ ही चोट पहुंचाया है। ज्ञात हो कि महापुरुष मंदिरों में नहीं चौक-चौराहों पर स्थापित होते हैं, जबकी भगवान विश्वकर्मा मंदिरों में स्थापित हैं और सभी के द्वारा सर्वत्र पूजित हैं। इनकी देव महत्ता का वर्णन सभी धर्म शास्त्रों और पुराणों में उल्लिखित है। विश्वकर्मा समाज के लोग रोजी-रोटी तथा स्वाभिमान की रक्षा के लिए विश्वकर्मा पूजा पर्व का अवकाश बहाल कराने, दस्तकार—शिल्पकार विकास निगम की स्थापना तथा हस्तशिल्प कुटीर उद्योग को जीएसटी मुक्त करने सहित 10 सूत्री मांगों को लेकर सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने कहा वोट हमारा—जुल्म तुम्हारा नहीं चलेगा। यदि सरकार हमारी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार नहीं करती है तो अगस्त के आखिरी सप्ताह से और व्यापक तथा उग्र आन्दोलन होगा। आगामी चुनाव में भी इस समाज के लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे।
इस अवसर पर बचाऊ लाल विश्वकर्मा, ओंकारनाथ विश्वकर्मा, रमेश विश्वकर्मा, भैरव प्रसाद विश्वकर्मा, भरत विश्वकर्मा, बाबू लाल विश्वकर्मा, प्रभु विश्वकर्मा, राजपत विश्वकर्मा, मनोज विश्वकर्मा, जितेंद्र विश्वकर्मा, डॉ0 नरेंद्र विश्वकर्मा, विनोद विश्वकर्मा, श्रीमती दुर्गावती देवी, सरोजा देवी, पुष्पा देवी, राधा देवी, अशोक विश्वकर्मा, सुनील विश्वकर्मा, सोनू विश्वकर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।