सामाजिक विकास के लिये संगठनों को तय करना होगा लक्ष्य

काश, समाज के निश्चित विकास के लिए सभी संगठन कुछ कार्यक्रमों पर अमल करते हुए लक्ष्य बनाते, जिससे कि समाज को लोकतांत्रिक व्यवस्था में सर्वश्रेष्ठ होने का गौरव प्रदान कराया जा सकता। समाज के पूर्ण विकास के लिए मेरा मत है कि सम्बंधित राज्यों के विधानसभा या लोकसभा चुनाव के पूर्व बहुत बड़ी रैली करते हुए अपनी ताकत का एहसास कराना। ऐसी ताकत का एहसास कराने के लिए दलगत व संस्था की भावना का त्याग करते हुए एक मंच पर आकर सभी नेताओं व समाजसेवियों को मिलकर स्वस्थ चेतावनी राजनीतिक दलों को देना कि हम सभी एक और संगठित हैं ताकि समाज के नेताओं को उनके दलों में उचित सम्मान व हक मिल सके।
गरीबी रेखा व अन्य आवश्यकता के अनुसार समाज के लोगों को चिन्हित करना, उन्हें उस वर्ग में सम्मिलित कराना ताकि सम्बंधित सरकारी योजना समाज के अधिकतर जरूरतमंदों को मिल सके। प्रधानमंत्री आवास के माध्यम से समाज के जरूरतमंद लोगों को घर, सभी छात्रों को संबंधित स्कूलों से स्कॉलरशिप दिलाना उद्देश्य होना चाहिए। विकलांग, वृद्धा, विधवावस्था की पेंशन पात्रों को अवश्य मिले यह सुनिश्चित कराना कर्तव्य होना चाहिए। चाहिए कि केंद्र व राज्य सरकार की सभी योजनाओं से समाज के लोगों को किसी भी कीमत पर लाभांवित कराया जा सके। ऐसी नीति व सिद्धांत का निर्धारण सभी संगठनों के लिए आवश्यक है।
संगठनों द्वारा प्रत्येक जिले व ब्लाक इकाई को मजबूत करना, ताकि घर-घर जाकर सभी लोगों का डाटा एकत्रित किया जा सके। जिससे कि विवाह योग्य वर व कन्या की वास्तविक जानकारी समय से हो सके और उनका विवाह एक तय उम्र तक समाज द्वारा भागीदारी निभाकर कराई जा सके। पढ़ने वाले छात्रों का अलग से डाटा तैयार करना जिससे कि सभी बच्चों को उनकी प्रतिभा के अनुसार शिक्षा प्राप्त हो सके, यह सुनिश्चित करना होगा। समाज को एक ऐसे संस्थान की स्थापना के लिए प्रयास करना होगा, जो कि विश्वकर्मा वंशियों को अतिरिक्त कौशल मुहैया कराकर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफल कराने में सक्षम हो। ऐसे संस्थान से शिक्षित व प्रशिक्षित बच्चे समाज से संस्कार का ज्ञान तो पाएंगे ही साथ में ही उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। जिनकी समझ के सहारे समाज अंतर उपजातीय विवाह को बढ़ावा देकर भविष्य में विश्वकर्मा वंशजों की संख्याबल का प्रदर्शन तो करेगा ही, साथ में विश्वकर्मा वंशज हम पांच एक साथ स्वत: आ जाएंगे। निश्चित ही ऐसे प्रशिक्षित बच्चे समाज का आईना होंगे। वह स्वत: निर्धारित कर देंगे कि समाज में विभेद का कोई स्थान नहीं। वे भविष्य में श्रेष्ठ व सर्वश्रेष्ठ समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले होंगे। इसी के साथ प्रत्येक जिले से कम-से-कम 50 लोगों का एक स्वयंसेवक दल बनाना होगा, जो विषम परिस्थितियों में प्रत्येक विश्वकर्मा वंशी परिवारों की तत्काल मदद को उपलब्ध हो। इस प्रकार से संख्या बल के प्रदर्शन से पीड़ित को न्याय मिलने में देर नहीं लगेगी। संगठनों को चाहिए कि भगवान विश्वकर्मा की सम्बंधित संगठन की ओर से फोटो सभी को उपलब्ध कराया जाय ताकि धार्मिकता का प्रचार-प्रसार हो सके और भगवान विश्वकर्मा पर आधारित टीवी धारावाहिक की शुरूआत नितांत आवश्यक है।
अंत में विश्वकर्मा वंशियों के लिए सर्वाधिक खुशी की बात यह है कि हम प्रत्येक गांव में हैं। क्यों-ही न हमारी संख्या किसी विशेष गांव में एक ही परिवार हो। उन सबको इस तरह से उसी उपरोक्त संस्थान से क्रमबद्ध प्रशिक्षित किया जाना चाहिए कि वह संबंधित गांवों/क्षेत्रों में सबके चहेते बन सके। समाज के लोग जैसे ही स्थान विशेष में प्रतिनिधित्व करने लगेंगे, हम राजनीतिक रूप से मजबूत आधार स्तंभ की ओर बढ़ चलेंगे। जिससे कि भविष्य में प्रत्येक विश्वकर्मा वंशी जन्मजात ही राजनैतिक होगा और यह कहा जाएगा कि इसका जन्म ही सत्ता प्राप्त कर सेवा करने के लिए हुआ है।
लेखक— अरविन्द विश्वकर्मा
अध्यक्ष— राजनारायण सर्वजन उत्थान सेवा संस्थान, लखनऊ

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