आईपीएस बनने के लिये छोड़ी एक लाख रूपये महीने की जॉब

जबलपुर। अधारताल निवासी 23 वर्षीय अभिनय विश्वकर्मा ने पहले ही अटेम्प्ट में यूपीएससी सिविल सर्विसेज में 196वीं रैंक हासिल की है। अभिनय का कहना है कि आईपीएस बनने का सपना पूरा करने के लिए 1 लाख रुपए महीने की जॉब छोड़कर पूरी मेहनत के साथ तैयारी की। उनका कहना है कि इस दौरान सिर्फ फैमिली मेंबर्स से बात करते थे और सोशल मीडिया से भी दूरी बनाई रखी।
लाखों युवाओं में से कुछ ही कर पाते हैं—
अभिनय ने बताया कि सवाल पूछा गया था कि जिस वक्त पुलवामा अटैक हुआ, अगर आप वहां पदस्थ होते तो, प्रशासनिक अधिकारी के रूप में क्या कदम उठाते? मॉर्डन फिलॉसफी से आप क्या समझते हैं। ये सवाल किसी क्विज के नहीं हैं, बल्कि देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी सिविल सर्विसेज साक्षात्कार के हैं, जिनके जवाब देकर शहर के अभिनय विश्वकर्मा ने यह कर दिखाया जो लाखों में से कुछ ही कर पाते हैं। उन्होंने यह एग्जाम 196वीं रैंक हासिल कर क्वालिफाई कर लिया है। 23 साल के अभिनय न्यू राम नगर अधारताल निवासी हैं। उन्होंने दिल्ली में रहकर प्रिपरेशन की और रोज 15 से 18 घण्टे पढ़ाई को दिए। दिलचस्प बात यह है कि मिडिल क्लास फैमिली से आने वाले अभिनय ने आईपीएस बनने के सपने को पूरा करने के लिए 1 लाख रुपये महीने की नौकरी छोड़ दी थी।
अच्छे गाइडेंस और अनुभव की जरूरत—
हमारे बीच एक धारणा बनी है दिल्ली जाकर तैयारी करने या आईआईटी के क्रेक करने के बाद ही एग्जाम क्वालीफाई किया जा सकता है, जबकि ऐसा नहीं है। इन सबसे ज्यादा जरूरी यह बात है कि आप कितने डेडिकेटेड हैं। जब आप अपना 100 प्रतिशत देंगे तो सफलता मिलेगी। हां, अच्छा गाइडेंस और अच्छे पियर ग्रुप में रहकर भी सफल हुआ जा सकता है। मैंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी, सही मायनों में खुद को हर तरह से आईसोलेटेड रखा। मैं सिर्फ अपने पैरेंट्स और भाइयों से ही बात करता था। जो मुझे हमेशा मोटीवेट करते थे।
आईआईटीयन हैं अभिनय—
अभिनय ने शहर के सेंट अलॉयसियस स्कूल और केन्द्रीय विद्यालय वीएफजे से पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने आईआईटी जेईई एग्जाम क्वालीफाई किया और आईआईटी बीएचयू से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इंजीनियिरिंग के बाद एक ऑटोमोबाइल कंपनी में 1 लाख रुपए महीने की जॉब उन्हें मिली। 1 साल तक जॉब करने के बाद उन्होंने जॉब छोड़ दी।
क्यों छोड़ी जॉब—
इस सवाल के जवाब में अभिनय कहते हैं कि जब मैं कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था, उस वक्त से मुझे समाज में घटने वाली घटनाएँ विचलित करतीं थीं। ऐसा लगता था कि पुलिस एफर्ट तो कर रही पर कुछ हो नहीं पा रहा। क्राइम इन्वेस्टिगेशन में रुचि थी, इसलिए मैंने पहला प्रेफरेंस आईपीएस को दिया, इसके बाद आईएएस और फिर आईएफएस। मुझे पूरी उम्मीद है कि अब मेरा सपना पूरा हो ही जाएगा।
अधूरा सपना पूरा हुआ—
अभिनय के पिता मोती विश्वकर्मा पटवारी हैं, वहीं माँ कल्पना कोसमघाट में एचएम हैं। घर में उनके अलावा दो भाई और हैं। बड़े भाई अभिषेक पुणे में जॉब करते हुए यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं, वहीं छोटे भाई विनायक इंजी0 की पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी माँ कहती हैं कि बेटे ने मेरा अधूरा सपना पूरा किया है। वहीं पिता कहते हैं कि जब जॉब छोडऩे की बात आई तो टेंशन हुआ, लेकिन बेटे ने एक मौका माँगा, हम सबने सपोर्ट किया।

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