प्रतापगढ़ के प्रकाश विश्वकर्मा का कमाल, अपने हुनर से बनाई ई—साईकिल

प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ निवासी दसवीं के छात्र प्रकाश विश्कर्मा के हुनर का हर कोई दीवाना है। प्रकाश ने इलेक्ट्रानिक स्कूटी की तर्ज पर अपनी रेंजर साइकिल को ई-साईकिल बना दिया है। उपकरणों की जानकारी जुटाने के बाद अपने हुनर व मेहनत से उसने यह सफलता प्राप्त की है। प्रकाश की तमन्ना आगे चलकर वैज्ञानिक बनने की है।
प्रकाश विश्वकर्मा फतनपुर थाना क्षेत्र के सेनापुर गांव का रहने वाला है। उसके पिता रमाशंकर विश्वकर्मा की शहर में एल्युमिनियम की दुकान है। माता रेखा विश्वकर्मा गृहणी हैं। प्रकाश का बड़ा भाई दीपक विश्वकर्मा लीलापुर गांव स्थित बाबू संतबख्श सिंह कालेज में बीएससी की पढ़ाई कर रहा है। प्रकाश बादशाहपुर स्थित द्विवेदी पैराडाइज पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 का छात्र है। बचपन से ही वह जिज्ञासु है। यही कारण रहा कि पांचवीं क्लास में उसने इलेक्ट्रानिक टार्च बनाई। घरवालों ने बचपना समझकर उपकरणों का प्रबंध किया। यकीन नहीं था कि प्रकाश के टार्च से रोशनी हो पाएगी, मगर प्रकाश ने अपने हुनर से घरवालों को अचंभित कर दिया। कक्षा सात में उपकरणों को एकत्र कर प्रकाश ने जेसीबी बनाई। जिस पर उसे खूब सम्मान मिला और अब 10वीं क्लास में उसने इलेक्ट्रानिक स्कूटी की तर्ज पर इलेक्ट्रानिक साइकिल बनाई है। प्रकाश के अनुसार, मामा की इलेक्ट्रानिक स्कूटी को देखने के बाद साइकिल में इस फार्मूले का इस्तेमाल किया। शुरू में उपकरणों की समझ कम थी, जिससे थोड़ी दिक्कत हुई। काफी प्रयास के बाद आखिरकार उसे सफलता मिली। उसकी साइकिल भी बगैर पैडलिंग के ही इलेक्ट्रानिक स्कूटी की तरह रफ्तार भरती है।
आठ हजार रुपये के खर्च में बन जाती है इलेक्ट्रानिक साइकिल—
ई-साईकिल बनाने में 24 बोल्ट वाले मोटर, 12 बोल्ट की दो बैट्री, थ्रोटल, स्पीड कंट्रोलर, ब्रेक लाइट, मीटर कंजोल का इस्तेमाल किया गया है। प्रकाश ने बताया कि कुल सात से आठ हजार रुपये के खर्च में तैयार इलेक्ट्रानिक साईकिल तैयार हो जाती है।

—कुलदीप कुमार विश्वकर्मा

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