स्वामी कल्याण देव की मनाई जयन्ती, प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

बागपत। विश्वकर्मा एकता विकास सभा उत्तर प्रदेश के तत्वाधान में आदर्श शिक्षा सदन इण्टर कालेज किरठल बागपत में वीतराग शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव की 142वी जयन्ती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर यज्ञ का भी आयोजन हुआ जिसके यजमान बलजोर सिंह विश्वकर्मा सपत्नी रहे। आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता मास्टर विनोद विश्वकर्मा (प्रदेश कोषाध्यक्ष) तथा संचालन सचिन विश्वकर्मा ने किया।


जयन्ती समारोह के अतिथि जगतगुरु विश्वकर्मा शंकराचार्य मौनी बाबा औघड़नाथ हरिद्वार, भ्रष्टाचार के विरूद्ध पूरे देश में साइकिल से यात्रा कर अलख जगाने वाले सुदर्शन प्रसाद विश्वकर्मा सन्तकबीरनगर, गुरुदत्त आर्य मुजफरनगर, शिवकुमार आर्य घरौंडा हरियाणा, पं0 अजेय भारद्वाज अध्यक्ष विश्वकर्मा ज्ञानपीठ साहिबाबाद, वरिष्ठ समाजसेवी व टांक ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष दिनेश वत्स विश्वकर्मा दिल्ली, राष्ट्र हित चिंतक मंच के अध्यक्ष सूर्यकांत शर्मा, वेदपाल पांचाल राष्ट्रीय महासचिव अखिल भारतीय विश्वकर्मा पांचाल महासभा, डॉ0 परमेन्द्र जांगड़ा भाजपा नेता लोनी, जगदीश पांचाल भाजपा नेता मुजफ्फरनगर, कृष्णपाल पांचाल अध्यक्ष दिल्ली प्रदेश अ0भा0 विश्वकर्मा पांचाल महासभा व एडवोकेट मनीष विश्वकर्मा प्रदेश अध्यक्ष रहे। संगठन द्वारा अतिथियों का शाल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया।
इस अचसर पर मांगेराम मुजफ्फरनगर, मुकेश विश्वकर्मा बिनोली बागपत व पण्डित विनोद विश्वकर्मा बागपत ने अपने भजनों के भक्तिरस से सभी का मन मोहा। अतिथियों द्वारा विश्वकर्मा समाज के कक्षा 1 से 10वीं व 12वीं में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र—छात्राओ एवं समाजसेवा में उत्कर्ष योगदान दे रहे समाजसेवियों को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया गया। अतिथिगण के कर कमलों द्वारा पौधरोपण भी किया गया।


वक्ताओं ने स्वामी कल्याणदेव के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा शिक्षा के बिना किसी व्यक्ति, समाज अथवा राष्ट्र का विकास सम्भव नहीं है। हम सभी को चाहिये कि बच्चों को संस्कारिक शिक्षा दें। स्वामी जी सब जानते थे इसीलिए उन्होंने शिक्षा का गांव—गांव दीप जलाया और 500 से भी अधिक शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की। शिक्षा पाकर ही अधिकारी, अफसर, जज, वकील, डॉक्टर, मास्टर, बिजनेसमैन, सरकारी अथवा गैरसरकारी नौकरियां पाई जा सकती है। शिक्षा के अभाव में बच्चे नशे व जुए जैसी गन्दी संगत की ओर आकर्षित हो जीवन नष्ट कर रहे हैं। हमें किसी भी हाल में बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलानी चाहिए।


विश्वकर्मा समाज में अनेक महापुरुष हुए हैं जिन्होंने देश के लिए अनेक कार्य किये, किन्तु सरकार उन्हें भुलाए बैठी है, उनका सम्मान नहीं करती न उन्हें याद करती है। उल्टा अपमानित करने का काम कर रही है। विश्वकर्मा समाज को केवल वोट बैंक समझ कर उत्पीड़न किया जा रहा है। विश्वकर्मा समाज ने हमेशा देश का भला चाहा और अपने सुखों का त्याग व बलिदान किया। आज सरकारों की उपेक्षा के कारण ही विश्वकर्मा समाज उपेक्षित है। लगातार भगवान विश्वकर्मा जी को अपमानित करने का काम किया जा रहा है।
कार्यक्रम के माध्यम से केन्द्र सरकार से निम्नलिखित मांग की गई—
1— विश्वकर्मा कुल गौरव स्वामी कल्याण देव के नाम से शिक्षा के क्षेत्र में उत्कर्ष योगदान देने वालों को पुरष्कृत किया जाए।
2— स्वामी कल्याण देव जी ने शिक्षा के क्षेत्र में देश को राह दिखाई उन्हें भारत रत्न सम्मान दिया जाए।
3— भगवान विश्वकर्मा दिवस अवकाश को बहाल कर पूरे देश में 17 सितम्बर को अवकाश रखा जाए।
4— केन्द्र व हरियाणा सरकार भगवान विश्वकर्मा जी को मजदूर/श्रमिक बताना बन्द करे व विश्वकर्मा दिवस को मजदूर दिवस न मनाए।
5— देश में सरकारी नौकरियों से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक जनसंख्या के आधार पर भागदारी सुनिश्चित करे।


इस अवसर पर सुशील पांचाल विश्वकर्मा थानाभवन, मेनपाल पांचाल शामली, ओमपाल पांचाल, रोहताश विश्वकर्मा, रूपचन्द विश्वकर्मा, महेंद्र विश्वकर्मा, राजपाल विश्वकर्मा, राजेन्द्र पाल पांचाल, धर्मपाल जांगिड़, रामकुमार विश्वकर्मा, सत्यप्रकाश विश्वकर्मा, जगदीश विश्वकर्मा, ओमप्रकाश विश्वकर्मा, राजीव विश्वकर्मा, राजबीर विश्वकर्मा, महेंद्र पांचाल, जितेंद्र जांगिड़, भरत पांचाल, मनोज विश्वकर्मा, सतपाल विश्वकर्मा, परवीन विश्वकर्मा, जोनी पांचाल एडवोकेट, संजय पांचाल, सोमपाल विश्वकर्मा, डॉक्टर राजेंद्र स्वामी शामली, सुधीर शर्मा, श्रीमती मंजू विश्वकर्मा, कमलेश विश्वकर्मा, राधिका विश्वकर्मा, सुदेश विश्वकर्मा, रत्न पांचाल, ब्रजपाल, शिवकुमार, धर्मपाल, राजीव कुमार, महिपाल, जगदीश, राजेन्द्र, विलेंद्र, रामनिवास, राजबीर, महेंद्र, ओमबीर, भरत, श्याम सिंह, प्रदीप, रामबीर, इलमचंद, राजेन्द्र, सुरेंद्र, बिरदेसन, ब्रह्पाल, सुभाष, चमन सिंह, रविन्द्र, राजपाल, रामनाथ, पालेराम सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे।

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