अपनी मेहनत से उच्च शिक्षा हासिल कर रही गाड़िया लोहार की बेटियां

झांसी। गाड़िया लोहार (लोहापीट) परिवारों में शिक्षा के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि अब इन परिवारों के बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। यहां तक कि लड़कियां भी उच्च शिक्षा हासिल कर रही हैं। हालांकि, इन्हें सरकार की ओर से कोई विशेष रियायत नहीं मिल रही है। यह अपने दम पर ही अपने मुकाम को तलाशने में जुटे हुए हैं।
इलाइट चौराहे से गोविंद चौराहे की ओर जाते समय बायीं ओर अक्सर एक लड़की लोहे के औजारों को पीट-पीट कर आकार देती नजर आती है। यह है जबर सिंह की बेटी रेशमा, जो गाड़िया लोहार बिरादरी की है। रेशमा की चार बहनें और दो भाई हैं। खास बात यह है कि रेशमा बीए पास है और पुलिस में भर्ती होने का उनका इरादा है। एक बार पुलिस भर्ती में वह शामिल हो चुकी हैं, सफलता नहीं मिली, लेकिन अब वह दोबारा से इसकी तैयारी कर रही हैं।
रेशमा बताती है कि उसके लिए बीए तक की शिक्षा हासिल करना बेहद मुश्किल रहा। इसमें परिवार का इतना भर सहयोग मिला कि किसी ने पढ़ने से रोका नहीं। जबकि, बिरादरी के तमाम लोगों ने इस पर ऐतराज ही जताया। इसके अलावा और भी परेशानियों का सामना करना पड़ा, इसमें सबसे ज्यादा समस्या किसी भी फॉर्म पर घर का पता भरने की आती है। क्योंकि, घर तो कोई है ही नहीं। बस, जैसे-तैसे काम चला लिया गया।
वहीं, बस स्टैंड के पास रहने वाली पूजा कभी स्कूल तो नहीं गईं, परन्तु वह ट्यूशन पढ़ने जाती है। हिंदी लिख-पढ़ लेती है और इंग्लिश का भी सामान्य ज्ञान हासिल कर लिया है।
गाड़िया लोहार परिवारों की यह दो बेटियां तो केवल बानगी भर हैं। इस बिरादरी के कई बच्चे आसपास सरकारी स्कूलों में दाखिला लिए हुए हैं और पढ़ने जाते हैं। शिक्षा के प्रति जागरूकता अब इस बिरादरी में साफ देखी जा सकती है। जो बदलाव के शुभ संकेत हैं।

दाखिला होगा और आवागमन की भी सुविधा मिलेगी—
गाड़िया लोहार परिवारों में शिक्षा के प्रति जागरूकता का आना अच्छे संकेत है। इन परिवारों के बच्चों को चिह्नित कर नजदीक के विद्यालयों में दाखिला दिलाया जाएगा। इसके अलावा आने-जाने के लिए विभाग की ओर से ऑटो जैसी सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। जल्द ही इस दिशा में काम शुरू कर दिया जाएगा।
—राजकुमार विश्वकर्मा, खण्ड शिक्षा अधिकारी

(साभार)

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