जालौर में विश्वकर्मा संकुल का शिलान्यास समारोह आयोजित

जालौर। जिला मुख्यालय पर विद्यार्थियों के अध्ययन के लिये छात्रावास एवं बाहर से आने वाले समाज बंधुओं के विश्राम के लिये अतिथि गृह सहित विश्वकर्मा संकुल के रूप में एक भव्य भवन का शिलान्यास 6 मई, 2018 को संतों, प्रमुख सामाजिक व्यक्तियों एवं भामाशाहों के सानिध्य में किया गया।


विश्वकर्मा विकास संस्थान जालौर द्वारा आयोजित इस भव्य शिलान्यास समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए अहमदाबाद के कस्टम एवं जीएसटी के डेप्युटी कमिश्नर दिनेश कुमार जांगिड़ ‘सारंग’ ने कहा कि “सामाजिक एकता एवं समरसता के साथ शैक्षिक विकास से सामाजिक संस्कारों का विकास होता है। बालकों के लिये यदि समाज कुछ करता है तो वही बालक आगे चलकर समाज के लिये कुछ करने के लिये सदैव तत्पर रहते हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में सामाजिक एकता की मांग को देखते हुए जांगिड़, सुथार, वंश सुथार आदि सभी वर्गों को साथ लेकर किया जा रहा यह कार्य और भी पुनीत बन गया है।’’


समारोह की अध्यक्षता करते हुए डूंगरपुर जिला न्यायाधीश मंछाराम सुथार ने कहा कि समाज में इस तरह के कार्य सामाजिक विकास के प्रतीक हैं और सभी समाज बंधुओं को इसमें तन, मन, धन से सहयोग करना चाहिये।


राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं विश्वकर्मा विकास संस्थान, जालौर के सरंक्षक पुखराज पाराशर ने सभी पधारे हुए अतिथियों का स्वागत किया। संस्थान के अध्यक्ष मोहन पाराशर ने संस्थान का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और अपने औपचारिक स्वागत भाषण में विश्वकर्मा संकुल की योजना को समझाया। संस्थान के उपाध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त अधिशाषी अभियंता बी0एल0 सुथार ने विश्वकर्मा संकुल की पूरी रूपरेखा को समाज के समक्ष रखा।


शिलान्यास समारोह में संत गंगानाथ जी, रणछोड़ भारती जी, विक्रमनाथ जी एवं सनातनगिरी जी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुआ। समारोह में देश भर से पधारे हुए भामाशाहों का अतिथियों एवं विश्वकर्मा विकास संस्थान के पदाधिकारियों ने स्वगात किया।
इस शिलान्यास कार्यक्रम में वंश सुथार समाज अध्यक्ष गणेश विश्वकर्मा, पाली समाज के पूर्व अध्यक्ष भंवरलाल जांगिड़, बैंगलोर जांगिड़ समाज ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष पोलाराम सुथार, युवा कार्यकर्ता युवराज सुथार एवं रतन सुथार, कानाराम जांगिड़, भगाराम सुथार, डाॅ0 ममता सुथार, हेमराज सुथार सहित देश भर से पधारे अनेक समाज बंधुओं ने भाग लिया।

2 Comments

  1. समाज की तरक्की के लिए एक अच्छी मिसाल है और यह मिसाल राज्य के कोने-कोने में जानी चाहिए ताकि समाज के दूसरे लोग भी प्रेरित होकर कुछ नया करने की सोचे वर्तमान हालात को देखते हुए सामाजिक एकता बहुत ही आवश्यक है इन्हीं अनिवार्य है परंतु विडंबना यह है की कुछ लोग इस समाज की एकता मैं बाधक बन जाते हैं आओ साथ चलें एक नई सोच के साथ

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