हरियाणा के श्रम राज्यमन्त्री की घोषणा से विश्वकर्मा समाज में आक्रोश

चण्डीगढ़। हरियाणा के श्रम राज्यमन्त्री नायब सिंह सैनी की एक घोषणा ने पूरे देश के विश्वकर्मा समाज में आक्रोश पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया में तो श्रम राज्मन्त्री की बहुत थू—थू हो रही है। पूरे देश से विश्वकर्मा समाज के लोग प्रधानमन्त्री व हरियाणा के मुख्यमन्त्री को पत्र लिख रहे हैं। ट्विटर पर भी खूब लिखापढ़ी हो रही है।
हुआ यूं कि श्रम राज्यमन्त्री ने 1 मई को मजदूर दिवस मनाने की बजाय विश्वकर्मा दिवस यानी 17 सितम्बर विश्वकर्मा पूजा के दिन मजदूर दिवस मनाने की घोषणा कर दी। मन्त्री की इस घोषणा की पूरे देश में निन्दा हो रही है। यहां तक कि सोशल मीडिया में लोगों ने मन्त्री से इस घोषणा को वापस लेकर पूरे समाज से माफी मांगने की भी बात कही जा रही है।


बता दें कि 17 सितम्बर विश्वकर्मा दिवस (विश्वकर्मा पूजा) के दिन पूरे विश्व में सभी जाति व धर्म ​के लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। इस दिन मजदूर दिवस मनाना भगवान विश्वकर्मा का अपमान है और लोगों की आस्था पर चोट करना है।
सामाजिक संगठन ‘विश्वकर्मा जागरूकता मिशन’ ने तो इस मुद्दे पर बाकायदा आन्दोलन की रणनीति तैयार कर ली है। संगठन के अध्यक्ष के अनुसार यदि एक सप्ताह के भीतर श्रम राज्यमन्त्री ने अपनी घोषणा वापस लेकर विश्वकर्मा समाज से माफी नहीं मांगी तो पूरे हुजूम के साथ हरियाणा के मुख्यमन्त्री कार्यालय का घेराव किया जायेगा। अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी सूरत में ‘भगवान विश्वकर्मा’ का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।


अध्यक्ष ने यह भी कहा कि एक तरफ हरियाणा के मुख्यमन्त्री भगवान विश्वकर्मा के नाम पर कौशल विश्वविद्यालय खोलकर उनका सम्मान करते हैं वहीं विश्वकर्मा दिवस के अवसर को मजदूर दिवस के रूप में मनाने की बात कर भगवान विश्वकर्मा का अपमान भी करते हैं। कहा कि अगर हम अच्छे कार्य की सराहना करते हैं तो गलत कार्यों की आलोलना भी करते हैं। भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के रचयिता हैं। उनके पूजन दिवस को मजदूर दिवस के रूप में मनाना सरासर अपमान है, जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।

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