लौहशिल्प और काष्ठशिल्प को बढ़ावा देने को बनेगी व्यापक कार्ययोजना— डॉ0 रमन सिंह

रायपुर| मुख्यमन्त्री डॉ0 रमन सिंह ने लोहारों को औजार बनाने के लिए जारी किए जाने वाले लायसेंस की प्रक्रिया को सरल बनाने की घोषणा की है। उन्होंने यह भी कहा है कि लोहारों को औजार निर्माण के लिए लकड़ी आदि असानी से मिल सके, इसके लिए भी नीति निर्धारित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा- लौहशिल्प और काष्ठशिल्प को बढ़ावा देने और इनमें काम कर रहे परम्परागत शिल्पकारों को बेहतर बाजार दिलाने तथा उनके सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक व्यापक रणनीति और कार्ययोजना भी बनायी जाएगी।
डॉ0 रमन सिंह जिला मुख्यालय राजनांदगांव में छत्तीसगढ़ लोहार (विश्वकर्मा) समाज के महासम्मेलन को मुख्य अतिथि की आसंदी से सम्बोधित कर रहे थे। सम्मेलन में समाज के प्रतिनिधियों ने मुख्यमन्त्री को बताया कि औजार निर्माण में लोहा गलाने की प्रक्रिया के लिए उन्हें लकड़ी की जरूरत होती है, जो आज कल काफी महंगी मिल रही है। इस पर मुख्यमन्त्री ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनकी इस समस्या का उचित निराकरण जल्द किया जाएगा और वे इसके लिए समाज के प्रतिनिधियों को आमन्त्रित कर उनसे विचार विमर्श करेंगे। उनसे प्राप्त सुझावों के आधार पर राज्य में लौहशिल्प और काष्ठशिल्प के विकास के लिए एक बेहतर कार्य योजना और रणनीति बनायी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा- लौहकर्म आदिमकर्म है और आज यह बहुत बड़े रूप में पहुंच गया है। भारत की पहचान उसके स्टील उद्योग से है और इसके पीछे विश्वकर्मा समाज का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि लोहारों के हुनर को निखारने के लिए शासन द्वारा कौशल विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। डॉ0 सिंह ने कहा- पौराणिक ग्रंथों की मानें तो विश्वकर्मा दुनिया के पहले इंजीनियर हैं। उन्होंने इस सृष्टि को अपने कलात्मक निर्माण से सुंदर बनाया। वे समाज के भी ईष्ट हैं और हम सबके भी आराध्य हैं।
महासम्मेलन को लोकसभा सांसद अभिषेक सिंह ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने कहा- इस प्रकार के सामाजिक सम्मेलनों से कई फायदे होते हैं। शासन को भी समाज के लोगों से मूल्यवान सुझाव मिलते हैं, जिनके आधार पर बेहतर नीतियां बनाने में आसानी होती है। उन्होंने कहा कि कौशल उन्नयन के माध्यम से आर्थिक आय बढ़ाने का प्रयास शासन द्वारा किया जाता है। इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। कौशल उन्नयन के लिए लोग आवेदन कर रहे हैं और बेहतर जीवन की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
महासम्मेलन में महापौर मधुसूदन यादव, राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष नीलू शर्मा, राज्य ऊर्दू अकादमी के अध्यक्ष अकरम कुरैशी, राज्य समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष शोभा सोनी, नागरिक आपूर्ति निगम के पूर्व अध्यक्ष लीलाराम भोजवानी, राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष रमेश पटेल, राजगामी संपदा न्यास के पूर्व अध्यक्ष संतोष अग्रवाल, राज्य अंत्यावसायी निगम के सदस्य पवन मेश्राम, सभापति शिव वर्मा, पूर्व महापौर नरेश डाकलिया, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दिनेश गांधी, विश्वकर्मा समाज के प्रदेश अध्यक्ष लोचन विश्वकर्मा एवं अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
इस मौके पर कलेक्टर भीम सिंह एवं जिला पंचायत सीईओ चंदन कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री को महासम्मेलन में विश्वकर्मा समाज के सदस्य शेखर विश्वकर्मा ने अपने हाथों से निर्मित उनकी एक तस्वीर भेंट की। मुख्यमंत्री इस तस्वीर से बेहद खुश हुए। उन्होंने शेखर की चित्रकला को बढ़ावा देने के लिए स्वेच्छानुदान से उन्हें 21 हजार रुपए देने की घोषणा की। समाज के एक अन्य सदस्य हरीश विश्वकर्मा ने लकड़ी पर उकेरा गया मुख्यमंत्री का चित्र उन्हें भेंट किया। उन्होंने इस पर हरीश को भी उनकी काष्ठकला के विकास के लिए 21 हजार रुपए का स्वेच्छानुदान देने की घोषणा की।

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