स्वरोजगार से जुड़कर पूजा विश्वकर्मा ने घर में ही शुरू की ‘पर्ल फार्मिंग’

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में बिलासपुर जिले की जबड़ापारा निवासी पूजा विश्वकर्मा स्वरोजगार से जुड़कर प्रदेश की एकमात्र अनूठी ‘मोती’ की खेती कर रही हैं। समंदर में मिलने वाली मोती की खेती पूजा अपने घर पर ही बने एक छोटे से तालाब में करती हैं। इतना ही नहीं इस खेती के माध्यम से पूजा लोगों को भी रूबरू करा रही हैं। पूजा इस ‘पर्ल फार्मिंग’ को बड़े स्तर पर और आगे बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन सरकारी विभाग की उदासीनता पूजा के इस सपने को पूरा होने से रोक रही है।


आपको बता दें कि जिले के जबड़ापारा में रहने वाली पूजा विश्वकर्मा महज 23 वर्ष की हैं। वह अपनी छोटी बहन काजल के साथ रहती हैं। दरअसल, महाराष्ट्र के नागपुर से पर्ल फार्मिंग की शिक्षा लेकर आई पूजा पिछले 4 साल से अपने घर पर पर्ल फार्मिंग कर रही हैं। इसकी प्रेरणा उसे अपनी बड़ी बहन से मिली थी, जिसका साथ पूजा को लम्बे समय तक नहीं मिल पाया।
इसके बाद खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूजा ने घर पर ही मोती की खेती शुरू कर दी। वहीं इस स्वरोजगार में सरकारी मदद न मिल पाने का दु:ख भी पूजा को है, लेकिन माता-पिता को खोने के बाद छोटी बहन को पढ़ाने की जिम्मेदारी भी पूजा पर ही है। पूजा के भरे पूरे परिवार से माता—पिता और बड़ी बहन के गुजर जाने के बाद अब केवल उसकी छोटी बहन ही उसके साथ रहती है।
पूजा का कहना है कि ‘पर्ल फार्मिंग’ अब उसका पैशन और आय का जरिया बन गया है। ‘पर्ल फार्मिंग’ से पूजा साल में करीब 60 से 70 हजार रुपए ही कमा पाती है, जिससे उसे अपना और अपनी बहन का खर्च चलाने में काफी परेशानी होती है। लिहाजा, पूजा इस काम को आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि वो आर्थिक रूप से मजबूत हो सके। साथ ही इससे वह प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहती है, लेकिन सरकार से कोई मदद न मिल पाने के कारण पूजा काफी हताश और निराश है।
बता दें कि सरकार एक तरफ तो महिला सशक्तिकरण के प्रयास की बातें कहती है, वहीं इस तरह के मामलों के सामने आने पर सरकारी दावों की पोल भी खुलने लगती है। हालांकि पूजा ने कई बार सरकार और विभाग से भी मदद की गुहार लगाई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। अब देखना होगा कि ऐसी अनूठी कला को सरकार से कब तक प्रोत्साहन मिल पाता है।

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