चार अप्रैल को पटना के गांधी मैदान में गरजेगा विश्वकर्मा समाज

पटना। अपने हक—हकूक व संविधान प्रदत्त अधिकार की मांग को लेकर बिहार प्रदेश का विश्वकर्मा समाज 4 अप्रैल को पटना के गांधी मैदान में एकत्रित होगा। समाज के लोग मंच से अपनी मांग तो रखेंगे ही, साथ में सरकार को चेतावनी भी देंगे। गौरतलब करने की बात यह है कि इस आयोजन में सम्पूर्ण विश्वकर्मा वंशीय समाज भाग ले रहा है।


विश्वकर्मा काष्ठ शिल्पी विकास समिति की तरफ से आयोजित इस ‘विश्वकर्मा अधिकार रैली’ में संविधान प्रदत्त आरक्षण की मांग पहले नम्बर पर है। ज्ञातव्य हो कि संविधान की अनुसूची 1950 में विश्वकर्मा वंशीय लोहारको बिहार राज्य में अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में रखा गया है। बाद में किन्हीं कारणों से इन जातियों को इस सूची से निकाल कर इनको मिलने वाले अधिकार को समाप्त कर दिया गया। विगत वर्ष एक वर्ग लोहार ने बड़ी लड़ाई के बाद खुद की वापसी तो इस सूची में करा लिया परन्तु अन्य जातियां वंचित रह गई। संविधान में प्रदत्त आरक्षण का लाभ विश्वकर्मावंश की सभी जातियों को मिले इसके लिये इस रैली का आयोजन किया गया है।
अभी कुछ ही दिन पूर्व लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय महासिचव डाॅ0 सत्यानन्द शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल भारत सरकार के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत और जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओरांव से मिलकर अपनी बात रखी थी। डाॅ0 सत्यानन्द शर्मा के अनुसार सरकार ने बढ़ई जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने और लोहार को (ओ0बी0सी0)की सूची से हटाने की कार्रवाई शुरू किया है। डा0 शर्मा ने बताया कि 2006 में बढ़ई जाति समेत कुम्हार, कहार, मल्लाह, लोहार, नाई, नोनिया, बिन्द, बेलदार, तुरहा, ताॅती, कानू (12 जातियों) को अनुसूचित जाति और जनजाति में शामिल करने का प्रस्ताव बिहार सरकार ने विधानसभा और विधान परिषद से पारित कराकर केन्द्र सरकार को भेजा था।
डाॅ0 शर्मा ने बताया कि एक ही दिन दो प्रस्ताव पारित कराकर बिहार सरकार ने केन्द्र सरकार को भेजा था। एक इन जातियों को अनुसूचित जाति और जनजाति में शामिल कराने का और दूसरा प्रस्वात झारखण्ड राज्य अलग करने का भेजा था। एक सप्ताह में हीं झारखंड राज्य को अलग करने का निर्णय भारत सरकार ने कर लिया परन्तु दूसरे प्रस्ताव को खाई में डाल दिया। बिहार सरकार से इन जातियों का इथनोग्राफी रिपोर्ट मांगा गया।
आगे डाॅ0 शर्मा कहते हैं चूंकि लोहार जाति को संविधान की अनुसूची में 1950 से रखा गया था। लोहारों ने 2006 से लगातार सड़कों पर आंदोलन किया इसी कारण बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोहार को अनुसूचित जनजाति में शामिल कर दिया। बढ़ई जाति का संशोधित रिपोर्ट भारत सरकार को प्राप्त हो गया इसलिए सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री ने वार्ता के तुरन्त बाद मामले को (आर0जी0आई0) को भेज कर कार्रवाई शुरू किया है।
विदित हो कि विश्वकर्मा समाज ने अपने आन्दोलन के दूसरे चरण में 4 अप्रैल 2018 को पटना के गांधी मैदान में विशाल रैली का आयोजन किया है उसी रैली में संघर्ष की घोषणा की जायेगी।

3 Comments

  1. Mehnat mat karo
    Bas arakshan se naukari lo. Nikammo
    Mai bhi sc/st me ata hu pr kabhi arakshan ka sahara nahi liya. Jisme yogta hogi apna jagah bana legga

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