बद्री विश्वकर्मा को अमेरिका ने बुलाया पर पैसे के अभाव ने रूलाया

दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले के बटियागढ़ निवासी बद्री विश्वकर्मा को अमेरिका के लॉस एंजलेस में बीते 3 फरवरी से आयोजित अमेरिका गॉट टेलेंट ऑडिशन में हिस्सा लेना था परन्तु पैसे के अभाव में बद्री की प्रतिभा धरी रह गई। मध्य प्रदेश के इस युवा का टैलेन्ट खुद अमेरिका देखना चाहता था और बद्री विश्वकर्मा भी अपना हुनर अमेरिका को दिखाकर भारत का नाम रोशन करना चाहता था, पर यह ऊपर वाले को मंजूर नहीं था। यह ऑडिशन अमेरिका में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले प्रसिद्ध अमेरिका गॉट टेलेंट के लिए किया गया था। ब्रदी विश्वकर्मा की प्रतिभा में वह खतरनाक स्टंट शामिल है जिन्हें देखकर लोग अचंभित हो जाते हैं। अब तक ब्रदी विश्वकर्मा अपने खतरनाक स्टंट देश के कई महानगरों में दिखा चुके हैं, लेकिन यह पहला अवसर था जब जिले से किसी को अपनी प्रतिभा सात समुंदर पार अमेरिका में दिखाने का अवसर मिला था।
दमोह के खली के नाम से प्रसिद्ध हो चुके बजरंग अखाड़े के बद्री विश्वकर्मा की प्रतिभा का सफर जिले के बाहर वर्ष 2004 में शुरु हुआ था, यह सबसे पहले 2004 में शॉबाश इंडिया में शामिल हुए थे, इसके बाद कई महानगरों में आयोजित होने वाले शो में इन्होंने भाग लिया। वर्ष 2014 व 2016 में दो बार इन्होंने इंडिया गॉट टेलेंट में अपनी प्रतिभा दिखाई, इसके बाद वर्ष 2015 में कोची उग्रम उज्जवलम् शो में शामिल हुए, इसी वर्ष जी तेलगू हैदराबाद शो में शामिल हुए, वहीं वर्ष 2016 में चैन्नई के एसआरनो सूर्या टीवी शो में शामिल हुए।
अमेरिका जाने में पैसा बना रोड़ा—
जांबाज बद्री विश्वकर्मा को अपनी जान दांव पर लगाने के बाद दिखाए गए स्टंटों से नाम व वाहवाही तो भरपूर मिली, लेकिन इससे इनकी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो सका। बटियागढ़ में बद्री विश्वकर्मा अपनी पुस्तैनी लोहे को पिघलाकर औजार तैयार करने की दुकान पर कार्य करते हैं। लोहारगिरी से जो पैसा मिलता है इससे इनके परिवार का भरण पोषण तो अच्छे से हो जाता है पर अमेरिका तक जाने के लिए पैसों की कमी रोड़ा बनकर सामने आ गई। ब्रदी का कहना है कि मेरे पास इतना पैसा नहीं है कि मैं अमेरिका जाकर अपनी प्रतिभा के जरिए जिले व देश का नाम रोशन कर सकूं। कोई मदद ही मुझे वहां तक पहुंचा सकती थी। मैंने अपने गांव के अखाड़े में सब कुछ सीखा है, मैं लुहार का कार्य करता हूं, खतरनाक स्टंट दिखाना मेरा जुनून है और यही मेरी प्रतिभा है। उम्मीद है कि इसी अप्रैल या मई माह में बद्री को अपना टैलेन्ट दिखाने के लिये लन्दन जाने का अवसर मिले, परन्तु फिर वही डर कि कहीं पैसा रास्ता न रोक ले? समाज के भामाशाह यदि बद्री की कुछ मदद कर सकें तो यह उसकी प्रतिभा को चार चांद लगाने में बड़ा सहयोग होगा।
‘विश्वकर्मा किरण’ पत्रिका परिवार की तरफ से बद्री विश्वकर्मा के लिये शुभकामनाएं।
रिपोर्ट— मुकेश विश्वकर्मा

2 Comments

  1. प्रिय साथियों, नमस्कार !
    यदि समाज के 500 व्यक्ति मात्र 500/ भी भेजे तो 2,50,0000 (ढाई लाख रुपया) हो जाता है। उचित होगा यदि विश्वकर्मा किरण एक अलग से अकाउंट खुलवाकर तत्काल उसका नंबर आम करके एक अपील इस नौजवान को लंदन भिजवाने के लिए कर दें तो मै समझता हूं कि ३ दिन में ही ढाई लाख से ज्यादा रुपया इस कोष में आजाएगा। अब विश्वकर्मा समाज में एक दूसरे की सहायता करने के लिए चेतना जाग चुकी हैं। जिस प्रकार नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान टाइम्स आदि समाचार पत्र दिल्ली में गरीब किन्तु टैलेंटेड बच्चों के लिए धन एकत्रित करने का अभियान चलाते हैं, मै भी चाहता हूं कि प्रतिष्ठित पत्रिका विश्वकर्मा किरण आगे आए और चेक अथवा ऑन लाइन द्वारा ऐसे प्रतिभाशाली नवयुवकों/ नवयुवतियों को आगे बढ़ाने के लिए समाज से धन एकत्रित करने का कार्य करें। इस नवयुवक का नाम के साथ पूरा पता छापा जाए तथा इस भाई के नाम अकाउंट खुलवाकर उसकी डिटेल आम की जाए ताकि आपके माध्यम से पैसा जमा कराया जा सके । ऐसे अकाउंट का अर्ध वार्षिक/वार्षिक ऑडिट भी होना चाहिए और उसकी डिटेल आपकी पत्रिका में छपती रहे ताकि धन देने वालों का विश्वास जमा रहे। पूरे भारतवर्ष के प्रत्येक स्टेट से एक एक प्रतिनिधि इकट्ठा होकर यदि दिल्ली में इसका मुख्यालय बनाया जाए और श्री होरी लाल शर्मा जी जैसे कोई कर्मठ ईमानदार व्यक्ति इसकी जिम्मेदारी ले तो मै समझता हूं कि ऐसे प्रतिभाशाली युवकों/ युवतियों के लिए किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए धन की कोई समस्या आडे नहीं आएगी।
    अति शुभकामनाओं सहित, अशोक शर्मा, दिल्ली

    • आपका सुझाव सराहनीय है। इस पर ​निश्चित विचार किया जायेगा।

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