दिव्यांग बच्चों पर शोध कार्य हेतु भोला विश्वकर्मा को मिला डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की उपाधि

वाराणसी/झुंझुनू। दिव्यांग बच्चों के सतत एवं व्यापक मूल्यांकन पर शोध कार्य हेतु वाराणसी के भोला विश्वकर्मा को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की उपाधि मिली है। अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा बेटी बचाओ—बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन हेतु झुंझुनू जिले को राष्ट्रीय सम्मान व राष्ट्रीय पोषण मिशन का उद्घाटन करने के एक दिन बाद श्री जगदीश प्रसाद झाबरमल टीबड़ेवाला विश्वविद्यालय, झुंझुनू ने अपना छठवां दीक्षांत समारोह का आयोजन सम्पन्न किया।
समारोह के मुख्य अतिथि सत्यपाल मलिक (राज्यपाल बिहार) को पुलिस की टुकड़ी द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर दिया गया। इस अवसर पर कलेक्टर दिनेश कुमार यादव, पुलिस अधीक्षक मनीष अग्रवाल, एएसपी नरेश मीणा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने कहा कि नारी शिक्षा से ही देश की तरक्की व भ्रष्टाचार में कमी सम्भव है। कुलाधिपति डाॅ0 विनोद टिबड़ेवाला की सराहना करते हुए राज्यपाल श्री मलिक ने कहा कि इस दुर्गम क्षेत्र में इतना वृहद विश्वविद्यालय बनाना व चलाना बहुत बड़ी बात है। श्री मलिक ने छात्रों से अपने जीवन के संघर्ष व प्रेरणादायक घटनाओं के बारे में चर्चा की व उनसे सीख लेने की सलाह दी।
दीक्षान्त समारोह में सौ से अधिक छात्र-छात्राओं व शोधार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। उत्तर प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चों के सतत एवं व्यापक मूल्यांकन से सम्बन्धित समस्या व तार्किक समाधान पर शोध कार्य हेतु वाराणसी के भोला विश्वकर्मा को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की उपाधि प्रदान की गई। कुलाधिपति डाॅ0 विनोद टिबड़ेवाल ने गुणवत्तापूर्ण शोधकार्य की सराहना करते हुए छात्र-छात्राओं को भविष्य में भी बेहतर प्रदर्शन की सलाह दी।

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